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अभिभावकों ने कहा आठवीं तक के स्कूल बंद हों

Fri, 22 Apr 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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तापमान बढ़ने से मुसीबत में बच्चे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अप्रैल महीने में स्कूलों के खुले होने और तापमान लगातार 40 से 45 डिग्री के बीच बने होने के कारण स्कूलों में छोटे बच्चों का बैठना कठिन हो गया है। जानलेवा गर्मी के बीच छोटे-छोटे बच्चों से पढ़ाई के लिए कहना उनके साथ अन्याय है। इस प्रकार की बातें अभिभावकों एवं शिक्षकों ने उठाई है। उनका कहना है कि जिले में रिकार्ड गर्मी को देखते हुए जिलाधिकारी आठवीं तक के स्कूलों को बंद करें। इसके साथ ही नौवीं से बारहवीं तक के स्कूलों का समय अधिकतम 10 बजे तक ही रखा जाए।
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अभिभावकों का कहना है कि दस से 11 बजे के बीच तापमान तेजी से बढ़ता है और उसके बाद स्कूलों में छुट्टी होने पर लू और तेज धूप के बीच बच्चों को घर जाना पड़ता है। जिस समय बच्चे घर पहुंचते हैं, उस समय तापमान अपने सर्वोच्च बिंदु पर होता है। आयकर विभाग के दीपेश सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक, बीएसए सहित सभी शिक्षाधिकारियों से अनुरोध किया है कि बच्चों के हित में स्कूलों को अप्रैल माह में पूरी तरह से बंद कर दिया जाए। इन अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के शहर आगमन पर उनके सामने बच्चों की परेशानी रखने का फैसला किया है।

तेज धूप एवं गर्मी में स्कूल छूटने पर शहर के चौराहों पर छोटे-छोटे बच्चे वैन, ट्राली एवं बस में जाम में फंसकर बीमार हो रहे हैं। जो बच्चे साइकिल से आते-जाते है, उनकी मुसीबत और है, वह पसीने से भीगकर गर्मी में चौराहों पर बेहोश होकर गिर रहे हैं। बालसन चौराहे एवं आनंद भवन के पास सेंट ऐंथोनी में छुट्टी होने पर जाम लग जाता है। ऐसे में लड़कियां बेहोश होकर गिर रही हैं। यही हाल शहर के अन्य स्कूलों के सामने है। अभिभावककों का कहना है कि तेलियरगंज, फाफामऊ में स्कूल छूटने के समय बड़ा जाम लगता है, ऐसे में एक घंटे में घर पहुंचने वाले बच्चे दो से तीन घंटे में स्कूल पहुंच रहे हैं। प्रशासन इन बच्चों की समस्या देखने स्कूल छूटने केसमय सड़कों पर निकले तो उन्हें पता चलेगा कि बच्चे किस परिस्थिति में स्कूल जा रहे हैं।
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