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-गंगा के लिए नया नारा, पहले धारा, फिर किनारा

Sat, 17 Jan 2015 01:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद। कुंभ, अर्द्ध कुंभ और माघ मेले के नाम पर आखिर कब तक गंगा को ‘जमानत’ पर छोड़ा जाएगा। यह प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। खास मौके पर गंगाजल को छोड़ा जाना उन्हें जमानत मिलने जैसा है। इसे संत बर्दाश्त नहीं करेंगे। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में 18 जनवरी को धर्मसंसद से पहले गंगा के लिए बड़े आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई है। गंगा प्रदूषित न हो सो संत परंपरा छोड़ जल समाधि के बजाय भूमि समाधि लेंगे। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान एजेंडे की घोषणा की गई।
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य व गंगा सेवा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हमें पहले गंगा की धारा चाहिए, किनारे को साफ करने की बात बाद में। मोदी सरकार अविरलता के बजाय निर्मलता की बात कर रही है पर संतों को पहले गंगा की अविरल धारा चाहिए।

धर्म संसद के संयोजक निरंजनी अखाड़े के सचिव व बड़े हनुमान मंदिर के महंत स्वामी नरेंद्र गिरि ने कहा, धर्म संसद में राममंदिर, धर्मांतरण सहित सनातन धर्म से जुड़े कई मुद्दों पर मुहर लगेगी। कवर्धा धर्म संसद के निर्णय साईं भगवान नहीं पर दोबारा विचार नहीं होगा। यदि कोई नया विचार संतों की ओर से आता है तो उसे सुना जाएगा। संतों की समाधि के लिए सरकार से भूमि की मांग की जाएगी। सहसंयोजक सतुआबाबा संतोषदास ने कहा कि धर्म संसद में सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधि व माघ मेला क्षेत्र में मौजूद संत महात्मा शामिल होंगे। बातचीत के दौरान शाकंभरी पीठाधीश्वर स्वामी सहजानंद ब्रह्मचारी, स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी भी मौजूद थे।
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