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Allahabad High Court :  नाबालिग ने हाईकोर्ट से मांगी गर्भपात कराने की इजाजत, जानें क्या है पूरा मामला

Sat, 04 Jun 2022 02:02 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मेडिकल बोर्ड इन पहलुओं की करेगा जांच
  • गर्भावस्था की अवधि
  • क्या गर्भावस्था को जारी रखने से याचिकाकर्ता के जीवन को कोई खतरा होगा?
  • क्या गर्भावस्था जारी रखने से याची को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कोई गंभीर क्षति होगी?
  • क्या इस बात का पर्याप्त जोखिम है कि यदि बच्चा पैदा होता है, तो वह किसी गंभीर शारीरिक या मानसिक असामान्यता से पीड़ित होगा?
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Prayagraj News : सांकेतिक चित्र। - फोटो : social media
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विस्तार
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एक रिश्तेदार के साथ संबंधों में आने से गर्भवती हुई नाबालिग लड़की ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से गर्भपात कराने की इजाजत मांगी है। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्राचार्य को निर्देशित करते हुए चार चिकित्सकों का बोर्ड गठित कर लड़की का परीक्षण करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में मेरठ के सत्र न्यायाधीश प्रथम को समन्वयक के तौर पर कार्य करने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने एसपी बागपत को भी सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने नाबालिग लड़की के पिता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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चार डॉक्टरों का बोर्ड गठित करने का आदेश
कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से कहा है कि वह नाबालिग लड़की के परीक्षण के लिए स्त्रीरोग, मनोरोग, रेडियोलॉजी या सोनोलॉजी और बाल रोग विभाग के डॉक्टरों के चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन करे और छह जून 2022 की सुबह 11 बजे नाबालिग लड़की का मेडिकल परीक्षण कराएं। कोर्ट ने याची को भी मेडिकल बोर्ड केसमक्ष उपस्थित होने केलिए कहा है।


मेडिकल बोर्ड परीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रथम अपर जिला न्यायाधीश मेरठ को प्रस्तुत करेगा, जो इसे तुरंत हाईकोर्ट को प्रेषित करेगा। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को कुल चार चीजों पर परीक्षण करने का निर्देश दिया है। कहा है कि बोर्ड अपनी रिपोर्ट सात जून तक हाईकोर्ट केसमक्ष प्रेषित कर दे। कोर्ट ने आदेश की कॉपी 24 घंटे के भीतर मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को मुहैया कराने को कहा है, ताकि आदेश का विधिवत पालन हो सके।
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यह है मामला
मामले में नाबालिग लड़की के अपने एक रिश्तेदार से संबंध हो गए थे। लड़की ने अपने बयान में कहा है कि उसने रिश्तेदार से शादी कर ली है। सोनोग्राफी रिपोर्ट के मुताबिक उसे 16 सप्ताह और पांच दिन का गर्भ है। इसकी जानकारी होने पर नाबालिग लड़की के पिता ने रिश्तेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच के दौरान रिश्तेदार पर दुष्कर्म का केस दर्ज किया। पिता का कहना है कि इस घटना से उसकी बेटी और परिवार के अन्य सदस्य सदमे में है।
 
 
नाबालिग होने के दौरान गर्भ होने से याची के जीवन के साथ-साथ उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी खतरा होगा। याची ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 की धारा तीन के तहत गर्भ समाप्त करने की अनुमति मांगी है। इस पर कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर पहले गर्भपात की स्थिति जाननी चाही है। मामले में कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया है कि पीड़ित और उसके पिता का नाम सार्वजनिक न किया जाए। 
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