चार डॉक्टरों का बोर्ड गठित करने का आदेश
कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से कहा है कि वह नाबालिग लड़की के परीक्षण के लिए स्त्रीरोग, मनोरोग, रेडियोलॉजी या सोनोलॉजी और बाल रोग विभाग के डॉक्टरों के चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन करे और छह जून 2022 की सुबह 11 बजे नाबालिग लड़की का मेडिकल परीक्षण कराएं। कोर्ट ने याची को भी मेडिकल बोर्ड केसमक्ष उपस्थित होने केलिए कहा है।
मेडिकल बोर्ड परीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रथम अपर जिला न्यायाधीश मेरठ को प्रस्तुत करेगा, जो इसे तुरंत हाईकोर्ट को प्रेषित करेगा। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को कुल चार चीजों पर परीक्षण करने का निर्देश दिया है। कहा है कि बोर्ड अपनी रिपोर्ट सात जून तक हाईकोर्ट केसमक्ष प्रेषित कर दे। कोर्ट ने आदेश की कॉपी 24 घंटे के भीतर मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को मुहैया कराने को कहा है, ताकि आदेश का विधिवत पालन हो सके।
यह है मामला
मामले में नाबालिग लड़की के अपने एक रिश्तेदार से संबंध हो गए थे। लड़की ने अपने बयान में कहा है कि उसने रिश्तेदार से शादी कर ली है। सोनोग्राफी रिपोर्ट के मुताबिक उसे 16 सप्ताह और पांच दिन का गर्भ है। इसकी जानकारी होने पर नाबालिग लड़की के पिता ने रिश्तेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच के दौरान रिश्तेदार पर दुष्कर्म का केस दर्ज किया। पिता का कहना है कि इस घटना से उसकी बेटी और परिवार के अन्य सदस्य सदमे में है।
नाबालिग होने के दौरान गर्भ होने से याची के जीवन के साथ-साथ उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी खतरा होगा। याची ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 की धारा तीन के तहत गर्भ समाप्त करने की अनुमति मांगी है। इस पर कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर पहले गर्भपात की स्थिति जाननी चाही है। मामले में कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया है कि पीड़ित और उसके पिता का नाम सार्वजनिक न किया जाए।