इलाहाबाद। संगमनगरी, सदी के महानायक ‘बिग बी’ अमिताभ बच्चन के हर सुख-दुख की सहभागी रही है तो अमिताभ की सांसों में भी इलाहाबाद रचा-बसा है। चाहे भाषा का संस्कार हो या फिर बंधवा वाले हनुमान मंदिर से हनुमत प्रेम के प्रति जुड़ाव सहित बाबूजी के साथ ब्वॉयज हाईस्कूल से आते-जाते मिलने वाली कोई भी सीख, अमिताभ जब तब अपने ट्विट, समारोहों या बातचीत में इलाहाबाद से जुड़े संदर्भ कहते, सुनाते रहे हैं।
अबकी अक्तूबर की दस्तक के साथ ही अमिताभ ने ट्विट करके पहले बाबू जी को याद किया, ‘जिंदगी में कितनी हैं खुशियां, जिंदगी में गम भी हैं कम/मिल के गमों को रुलाएं, आओ जिंदगी को हंसाएं।’ अगले दिन गांधी जयंती पर उन्होंने महात्मा गांधी के अस्थिकलश के संगम में विसर्जन की यादें साझा कीं।
सुपरिचित गीतकार यश मालवीय कहते हैं, ऐसे ही एक ट्विट के माध्यम से अमिताभ ने क्लाइव रोड स्थित रानी बेतिया की कोठी को भी याद किया तो यह अकारण नहीं है। बच्चन जी ने भी अपनी आत्मकथा में रानी बेतिया की कोठी के बारे में तकरीबन दो पेज लिखे हैं। क्लाइव रोड से ब्यायज हाईस्कूल जाते और लौटते हुए अमिताभ, बाबूजी से उसके बारे में तमाम बातें सुनते थे। अमिताभ के लिए वह कोठी जिज्ञासा का विषय थी। वहीं उनके लिए रानी की परिकल्पना परियों की राजकुमारी जैसी रही।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में प्रख्यात साहित्यकार पुष्पा भारती ने भी रानी बेतिया की कोठी से जुड़ी यादें साझा कीं। कहा, यह कोठी उनके क्लाइव रोड स्थित आवास के सामने ही थी, जिसके बारे में अक्सर चर्चा होती रहती थी सो मुन्ना (अमिताभ) को कोठी के भीतर जाने के लिए उत्सुकता थी। कई बार कोशिश भी की लेकिन हर बार वहां का दरबान उसे रोक देता था।
एक बार जिद करने पर दरबान ने मुन्ना से कहा कि चवन्नी ले आओ तो भीतर जाने दूंगा। कोठी के भीतर जाने की ललक ऐसी थी कि मुन्ना ने वह चवन्नी मां की ड्रेसिंग टेबल से चुरा ली। मां को पता चला तो उन्होंने बहुत डांटा, फिर बाबूजी ने समझाया था, ‘चोरी नहीं करनी चाहिए, जरूरत थी मुझसे मांग लेते।’ बाद में अमिताभ को अपनी भूल का एहसास हुआ और इस घटना के बाद उन्होंने जीवन भर चोरी न करने का संकल्प ले लिया।