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हाईकोर्ट ने पूछा, अनुच्छेद 356 का

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The High Court asked, Article 356
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प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2019 के पांच प्रश्नों के जवाब गलत होने को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी से तीन दिन में जवाब मांगा है। कोर्ट ने ‘अनुच्छेद 356 का पहली बार प्रयोग कब हुआ’ और ‘सरसों शब्द पुलिंग है या स्त्रीलिंग’ पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। कोेर्ट ने याचीगण द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर प्राधिकारी से स्पष्ट जवाब हलफनामे के मार्फत दाखिल करने के लिए कहा है। टीईटी अभ्यर्थी अखिलेश की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी सुनवाई कर रहे हैं।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने आठ जनवरी 2020 को आयोजित टीईटी की परीक्षा दी थी। लिखित परीक्षा के बाद 13 जनवरी को उत्तरकुंजी जारी की गई। याची ने ए सीरीज पुस्तिका के हिंदी खंड दो के प्रश्न संख्या 35 और खंड संख्या पांच के प्रश्न संख्या 124, 139 और 144 पर आपत्ति दाखिल की गई। मगर, उसकी आपत्तियों का निस्तारण किए बिना अंतिम उत्तरकुंजी जारी कर दी गई।
याचिका में कहा गया है कि एक प्रश्न कि अनुच्छेद 356 का प्रयोग देश में पहली बार कब किया गया के चार विकल्प दिए गए हैं, जिसमें जम्मू कश्मीर 1956, केरल 1957, बिहार 1958 और मध्यप्रदेश 1957 दिए गए थे। याची ने पहले विकल्प जम्मू कश्मीर 1956 को चुना, जबकि प्राधिकारी की उत्तरकुंजी में केरल 1957 को सही विकल्प माना गया है। इसी प्रकार से प्रश्न पूछा गया था कि इनमें से कौन सा शब्द पुलिंग है। विकल्प था कढ़ी, कील, संतान और सरसों। याची ने अपने जवाब में सरसों को सही माना है, जबकि उत्तर कुंजी में संतान को पुल्लिंग माना गया है। याचिका में मान्य पुस्तकों का हवाला देकर कहा गया है कि याची का उत्तर ही सही है। इसी प्रकार से अन्य प्रश्नों के सही जवाब को लेकर मान्य पुस्तकों का हवाला दिया गया है। याचिका पर 12 फरवरी का सुनवाई होगी।
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