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सरकार को नहीं पता ‘कल्चर’ की परिभाषा

Thu, 02 Mar 2017 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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नाट्य वृक्ष की निदेशक और भरतनाट्यम की जानी-मानी कलाकार पद्मश्री डॉ.गीता चंद्रन ने कला और संस्कृति के प्रति सरकार की उपेक्षा पर नाराजगी जताई है। कहा, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ का नारा देने वाली सरकार कला और संस्कृति के प्रति उदासीन है। इस क्षेत्र के बजट को लगातार घटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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एक कार्यक्रम के सिलसिले में इलाहाबाद आईं डॉ.चंद्रन ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कला-संस्कृति के प्रति सरकारी रवैए का जिक्र किया। कहा, सरकार को ‘कल्चर’ की परिभाषा ही नहीं पता है। संस्कृति तो देश की आत्मा है। गायन, वादन, नृत्य की त्रिवेणी तो बहती ही रहेगी, भले ही इसकी दिशा बदलती रहे। सरकार को पूरी प्रतिबद्धता से संस्कृति के संरक्षण और विकास को प्रोत्साहित करना होगा। कला-संस्कृति के क्षेत्र को पर्याप्त तवज्जो जरूरी है।

इसके लिए जहां उन्होंने मीडिया से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा की, वहीं सुझाव भी दिया कि मीडिया को दिल्ली के गुलमेहर प्रकरण को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए। उसे स्टार के तौर पर पेश करने से ही मामला सुर्खियों में पहुंचा।
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