पद्मभूषण और अंतरराष्ट्रीय कलाकार तीजन बाई का कहना है उनके बाद भी पाण्डवानी दुनिया भर में अपना परचम लहराएगी। सोमवार को एक कार्यक्रम के सिलसिले में इलाहाबाद आईं तीजन बाई ने गंगा को प्रणाम करने के बाद यही संकल्प दोहराया। कहा, कल तक भले ही इस विधा में एक्का दुक्का नाम रहे हो लेकिन आने वाले समय में सैकड़ों कलाकार पाण्डवानी का परचम लहराएंगे।
‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में पद्मभूषण तीजन बाई ने महिलाओं की स्थिति, पाण्डवानी की विरासत को आगे ले जाने समेत कई मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। बताया कि इस विधा को आगे ले जाने के लिए कलाकार तैयार कर रही हैं। 212 कलाकारों को पाण्डवानी गायन विद्या का प्रशिक्षण दे रही हैं। इसमें लड़के-लड़कियां दोनों शामिल हैं।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए तीजनबाई ने कहा कि हमारे समय के मुकाबले आज महिलाओं की स्थिति में काफी सकारात्मक बदलाव आए हैं। आज अभिभावक बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। अपने व्यक्तिगत जीवन पर बात करते हुए कहा कि, पाण्डवानी की तरफ रुझान होने पर उन्हें घर से बेघर कर दिया गया था। घर में तो मार पड़ती ही थी, बिरादरी के लोग भी बात नहीं करते थे।
इस विधा को सीखने और आगे बढ़ाने के लिए बहुत कुछ झेला है, पर ईश्वर ने उनकी मेहनत और संघर्ष का उन्हें इनाम भी दिया है। जब तक संभव होगा, इस कला को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करती रहेंगी। तीजनबाई ने बताया कि संगमनगरी आना उन्हें हमेशा ही भाता है। मां गंगा की गोद में सुख-शांति मिलती है। इस शहर के लोगों से उन्हें हमेशा प्रेम और सम्मान मिला है। एक कलाकार के लिए दर्शकों का स्नेह और सम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है।