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मठों-मंदिरों से लेकर घरों तक सजी नटवर नागर की नयनाभिराम झांकियां

Tue, 31 Aug 2021 12:02 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कृष्ण जन्मोत्सव की निराली छटा सोमवार को कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद यादगार बन गई। रोहिणी और कृत्तिका नक्षत्र से युक्त हर्षण योग में भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी पर रात 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म होते ही बधाई बजने लगी।
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Prayagraj News : मनमोहक वेश में सजाए गए कान्हा के रूप में बच्चे। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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फूलों के वंदनवारों, रंगोलियों, दीपमालाओं और ध्वजा-पताकाओं से सजे मठ-मंदिरों से लेकर घरों तक की छटा सोमवार की आधी रात बदल गई। दूसरी लहर के बाद यह पहला मौका था, जब कान्हा के जन्मोत्सव पर नाइट कर्फ्यू हटने से कृष्ण भक्तों का उत्साह भक्ति के सागर में उमड़ पड़ा। कृष्ण जन्मोत्सव के इस मौके को सोहर, मंगल गीतों, भजनों से संगीतमय बनाया गया। कहीं गोवर्धन पर्वत उठाए कान्हा की झांकी सजी तो कहीं ग्वाल बालों के साथ राधा-कृष्ण के रास रचाने की। संगमनगरी में नटवर नागर के प्राकट्योत्सव की बधाई हर तरफ ऐसी ही थी।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2021 शुभकामना संदेश - फोटो : Amar ujala
कृष्ण जन्मोत्सव की निराली छटा सोमवार को कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद यादगार बन गई। रोहिणी और कृत्तिका नक्षत्र से युक्त हर्षण योग में भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी पर रात 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म होते ही बधाई बजने लगी। बलुआ घाट स्थित इस्कॉन मंदिर में रंग-बिरंगे फूलों, झालरों से भव्य झांकी सजाई गई। सूरज ढलने के बाद से ही मंदिर में झांकी दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग गया। मंत्रोच्चार के बीच श्रीकृष्ण भगवान का चांदी के कलश से महाभिषेक किया गया।

जन्माष्टमी 2021 - फोटो : अमर उजाला
फिर उन्हें 108 व्यंजनों का भोग अर्पित कर उसे प्रसाद भक्तों को बांटा गया। इस मौके पर आचार्यों की मौजूदगी में जन्मोत्सव की धूम मची रही। इसी तरह सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर में भी भव्य जन्मोत्सव मनाया गया। रूप गौड़ीय मठ में भी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की नयनाभिराम झांकी सजाई गई। भक्तों ने भजन-कीर्तन के जरिए श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया। इसी तरह महाशक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर परिसर स्थित श्रीराधाकृष्ण मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शंखध्वनि, नगाड़े की गूंज के बीच श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। पुजारी श्यामजी पाठक ने प्रसाद वितरित किया।

जन्माष्टमी 2021 - फोटो : iStock
उधर, सिद्धपीठ भोलेगिरि मंदिर में जन्मोत्सव पर मोहक शृंगार कर पूजन किया गया। उधर, त्रिवेणी बांध स्थित देवरहा बाबा सेवाश्रम में डॉ रामेश्वर प्रपन्नाचार्य की देखरेख में बाल रूप कृष्ण का पंचामृत से स्नान कराकर पूजन किया गया। लूकरगंज स्थित श्रीकृष्णा भवन में भी सोमवार को जन्मोत्सव की यादगार झांकी कोविड प्रोटोकॉल में सजाई गई। आयोजन सचिव डॉ निखिल सक्सेना की मौजूदगी में भगवान कृष्ण की बाल लीला पर आधारित झांकियां सजाई गईं। रात 12 बजे आरती उतारी गई। इस मौके पर अरुण कुमार सक्सेना, शशि सक्सेना, अमित सक्सेना, नीतेश, आराध्या, निष्ठा समेत कई लोग मौजूद रहे।  इसी तरह मीरापुर स्थित मां ललितादेवी के मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। फूलों से शृंगार किया गया। इसी के साथ मंदिर में छह दिवसीय जन्मोत्सव आरंभ हो गया।

कृष्ण जन्माष्टमी 2021 शुभकामना संदेश - फोटो : Amar ujala
कटरा में जन्माष्टमी पर लीला देखने पहुंचे सांसद: विधायक
कटरा रामलीला कमेटी की ओर से सोमवार को जन्माष्टमी को कृष्ण लीला के मंचन से खास बनाने की कोशिश की गई। इस दौरान 80 फीट लंबे और 40 फीट चौड़े मंच पर गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाए कृष्ण की झांकी हर किसी का ध्यान खींचती रही। ध्वनि-प्रकाश पर आधारित भगवान कृष्ण की लीला का मनोहारी मंचन किया गया। इससे पहले सांसद केशरी देवी पटेल, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी ने उद्घाटन किया। अतिथियों का स्वागत कमेटी के अध्यक्ष सुधीर कुमार गुप्ता कक्कू और गोपाल बाबू जायसवाल ने किया। इस मौके पर अवधेश चंद्र गुप्ता, शंकर लाल चौरसिया, मयंक अग्रवाल, विनोद केसरवानी, राकेश चौरसिया, महेश चंद्र गुप्ता समेत कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। 
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जन्माष्टमी - फोटो : SELF
क्रियायोग आश्रम में जन्माष्टमी पर योग साधकों ने लिया शांति-समता के पथ पर चलने का संकल्प
क्रियायोग अनुसंधान संस्थान में सोमवार को कृष्ण जन्माष्टमी पर कई देशों और प्रांतों के साधकों ने शांति और समता के पथ पर चलने का संकल्प लिया। आश्रम के संस्थापक योग गुरु स्वामी योगी सत्यम ने कहा कि जिस तरह कृष्ण ने अर्जुन को संदेश दिया था, उसी तरह महाअवतार बाबा ने 19 वीं शताब्दी में लाहिड़ी महाशय को क्रिया योग के ज्ञान का संदेश देकर मानव कल्याण के लिए भेजा था। उन्होंने कहा कि कृष्ण जन्म का उत्सव कौरव और पांडव को एक में मिलाने का आध्यात्मिक अवसर है। इसी क्रियायोग से समता और शांति की स्थापना संभव है। इस मौके पर अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, ब्राजील, आस्ट्रेलिया समेत कई देशों के योग साधक मौजूद रहे।
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