देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए इस वर्ष से शुरू हो रही राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इस व्यवस्था से मेडिकल की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी इसे अपने लिए बेहतर मानते हैं। मुन्नाभाइयों और दलालों का जाल खत्म हो जाएगा। छात्रों को एक ही तैयारी करनी होगी। कई जगह आवेदन करने की बजाय एक ही परीक्षा में शामिल होकर कॅरियर को नई राह दे सकेंगे।
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए अभी छात्रों को कई प्रवेश परीक्षाओं से गुजरना पड़ रहा है। छात्र ऑल इंडिया स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते ही थे। राज्य स्तर पर होने वाली अलग-अलग परीक्षाओं में शामिल होते थे। अलग-अलग राज्यों की परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्हें आवेदन भी अलग-अलग करने पड़ते थे। फार्म भरने में ही उनके 10 हजार रुपये खर्च हो जाते थे। अभ्यर्थी जागृति गुप्ता, शालिनी कहती हैं कि राज्यों की अलग-अलग परीक्षाओं के लिए उन्हें तैयारी भी अलग-अलग पैटर्न पर करनी पड़ती थी। परीक्षा देने के लिए भी उन्हें अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता था। नीट के होने से इन सब चीजों से उन्हें राहत मिल जाएगी।
अब उन्हें एक ही परीक्षा देना होगा और तैयारी भी एक ही पैटर्न पर करनी होगी। परीक्षा देने के लिए भी बार-बार कही जाना नहीं होगा। मेडिकल छात्र अभिषेक झा कहते हैं कि छात्रों को च्वाइस का बेहतर मौका मिल जाएगा। राजकीय पीजी कॉलेज हंडिया के असिस्टेंट प्रोफेसर एके वर्मा कहते हैं कि इसके शुरू होने से छात्र मानसिक दबाव से उबर जाएंगे। कोर्स कम होने से अभ्यर्थी तैयारी आसानी से कर लेंगे। अभिभावकों के ऊपर भी दबाव कम हो जाएगा। मेडिकल एक्सपर्ट्स सीपी शर्मा कहते हैं कि नीट होने से प्रवेश परीक्षा में दलालों और मुन्नाभाइयों की दाल नहीं गल पाएगी।
परीक्षा में पारदर्शिता होगी जिससे कि प्रतिभाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं हो पाएगा। अभी मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं में आए दिन पेपर आउट होने, मुन्नाभाई पकड़े जाने जैसी खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन केंद्रीयकृत व्यवस्था होने से इन सबसे मुक्ति मिल जाएगी। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के मकड़जाल से भी छात्रों को मुक्ति मिल जाएगी।