मोदी लहर में सपा के हर सियासी दांव तो फेल हुए ही प्रत्याशियों के चयन में सुस्ती भी पार्टी पर भारी पड़ी। इलाहाबाद और फूलपुर दोनों ही सीट पर सपा ने नामांकन के अंतिम दिनों में प्रत्याशियों की घोषणा की। जबकि, भाजपा उम्मीदवार तब तक प्रचार अभियान का पहला चरण पूरा कर चुके थे। इसके अलावा सपा ने दोनों ही सीट पर नए चेहरों पर भरोसा जताया। जबकि, भाजपा की ओर से दोनों ही सीट पर कद्दावर नेता मैदान में थे।
इलाहाबाद सीट से रीता बहुगुणा को भाजपा का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही चर्चा रही कि सपा भी बड़े कद के नेता पर विचार करेगी। इसमें रेवती रमण सिंह का नाम सबसे ऊपर रहा। इसी तरह से फूलपुर सीट पर भी सपा की ओर से किसी पटेल को उम्मीदवार बनाए जाने या बड़े कद के नेता के उतारे जाने की चर्चा रही।
इस कवायद के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के भतीजे तेज प्रताप सिंह के नाम की भी चर्चा रही लेकिन बसपा के कैडर मतों को अपने साथ मान रही सपा ने दोनों सीट पर अपने परंपरागत यादव तथा अन्य पिछड़ी जातीयाें को साधने की कोशिश की। इस कवायद के तहत ही फूलपुर से पंधारी यादव तथा इलाहाबाद से राजेंद्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया। सपा ने इलाहाबाद सीट की लड़ाई को अगड़ा बनाम पिछड़ा बनाने की भी कोशिश की लेकिन मोदी लहर और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर सपा का दांव सफल नहीं हुआ।