लालापुर थाना क्षेत्र के पंडुवा गांव में तीन दिन पहले मुंबई से लौटे एक व्यक्ति की क्वारंटीन सेंटर में मौत हो गई। प्रवासी की मौत के बाद ग्रामीणों व अन्य क्वारंटीन सेंटर में रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। ग्राम प्रधान की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
लालापुर थाना क्षेत्र के पंडुआ गांव निवासी मो. मुस्लमीन (38) पुत्र मो. नईम परिवार के साथ मुंबई के उल्हास नगर में रहता था। बीती 13 मई को निजी वाहन से अपनी पत्नी नूरजहां व दो वर्षीय पुत्र मो. अमान, गांव के मतलूम व अनवार के साथ मुंबई से अपने गांव आया था। गांव आने के बाद सभी को गांव के ही परिषदीय विद्यालय में क्वारंटीन कर दिया गया था। शनिवार रात करीब 11 बजे मुस्लमीन को सीने में हल्का दर्द शुरू हुआ और दर्द धीरे-धीरे बढ़ने लगा।
देर रात करीब दो बजे तेज हो गया और वह तड़पने लगा। साथियों ने एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन जब तक एंबुलेंस पहुंचती, तब तक क्वारंटीन सेंटर पर ही मुस्लमीन की मौत हो गई। मुस्लमीन की मौत की सूचना पर क्षेत्राधिकारी बारा आरपी दोहरे, नायब तहसीलदार रविकांत द्विवेदी, राजस्व निरीक्षक तेज नारायण शुक्ल, हंसराज जैसवार, संतोष मिश्र, थानाध्यक्ष लालापुर संतोष कुमार सिंह और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ डॉक्टरों की टीम के साथ मौके पहुंचे। टीम ने क्वारंटीन सेंटर में जांच पड़ताल की। शनिवार सुबह 11 बजे आई स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबुलेंस से शव को कोरोना जांच के लिए प्रयागराज लेकर गई।
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पंड़ुआ परिषदीय विद्यालय में क्वारंटीन 55 लोगों में से एक मुस्लमीन की जब तबीयत खराब हुई तो वह दर्द से तड़पता रहा और दो घंटे तक दीवार से अपना सीना टकराकर चिल्लाता रहा। लेकिन कोरोना के खौफ के कारण कोई उसके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। यहां तक कि दो साल के मासूम बेटे को लेकर कमरे के बाहर बैठी आठ माह की गर्भवती पत्नी भी बेबसी में अपने शौहर को तड़प-तड़प कर मरते हुए देख थी।
करीब एक साल पहले अपनी पत्नी और बेटे अमान को लेकर मुंबई गया मुस्लमीन वहां पर फर्नीचर बनाने का काम करता था। उसी से अच्छी आमदनी होती थी। जब से कोरोना की वजह से लॉकडाउन हुआ तब से मुस्लमीन परेशान था, क्योंकि उसकी पत्नी गर्भवती थी। किसी तरह से जुगाड़ करके निजी वाहन से 13 मई को घर पहुंचा था। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे गांव के ही परिषदीय विद्यालय में क्वारंटीन कर दिया गया था।
शनिवार रात में 11 बजे करीब उसके सीने में दर्द उठा। पहले तो किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन, 12.30 बजे के आस-पास दर्द ज्यादा बढ़ गया। मुस्लमीन चीखने लगा। उसकी चीख सुनकर वहां क्वारंटीन लोग भागकर स्कूल के बाहर भाग गए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मुस्लमीन अपना सीना स्कूल की दीवार पर जोर-जोर से मार कर चिल्ला रहा था। लेकिन, कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। सब डरे हुए थे कि वह कोरोना संक्रमित है। पता चलने पर रात में गांव के लोग एवं प्रधानपति पहुंचे जरुर, लेकिन तब तक में उसकी मौत हो चुकी थी।