विश्वविद्यालय स्तर तक खेलने की मिली थी अनुमति
उन्होंने हिम्मत कर घर पर अपने फुटबॉल खेल के बारे में बताया। पिता रमेश तिवारी और मां सीता तिवारी ने साफ मना कर दिया। इस मौके पर भाई ने उनका साथ दिया और पिता से बात की। इसके बाद उन्हें इस शर्त पर अनुमति मिली की वे यूनिवर्सिटी स्तर पर खेलकर खेल छोड़ देंगी। उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की ओर से अच्छा प्रदर्शन किया। पिता ने जब उनके प्रदर्शन के बारे में सुना तो उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद किसी ने उन्हें खेलने से कभी मना नहीं किया।
गाजियाबाद में 24 नवंबर से तीन दिसंबर तक आयोजित होने वाली राष्ट्रीय सीनियर महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश टीम में शामिल श्रेया तीन बार यूनिवर्सिटी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का हिस्सा बन चुकी हैं। वहीं, दो बार स्टेट चैंपियनशिप में मिर्जापुर का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। राइट बैक डिफेंडर पोजिशन पर खेलने वाली श्रेया का सपना भारतीय महिला फुटबॉल टीम की ओर से खेलने का है। वह वर्तमान में इविवि की फुटबॉल टीम का भी हिस्सा हैं।
पढ़ाई में भी हैं अव्वल
श्रेया बताती हैं कि अकसर कहा जाता है कि खेल से पढ़ाई पर असर पड़ता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। वह अपने खेल को पूरा समय देती हैं। इसके बावजूद वह पढ़ाई में भी अव्वल हैं। इविवि में एलएलबी के चौथे सेमेस्टर में उन्होंने कॉलेज टॉप कर इसे साबित भी किया है।