इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महराजगंज के सोनौली में एक निजी अस्पताल को बिना ठोस आधार के सिर्फ शिकायत पर सील करने की कार्रवाई पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए तत्काल अस्पताल की सील हटाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने डॉ.नरेश कुमार गुप्ता की याचिका पर दिया है।
याची एक निर्माणाधीन अस्पताल के संचालक हैं। एक कर्मचारी ने जुलाई 2025 को पुलिस में शिकायत की। आरोप लगाया कि अस्पताल में सरकारी दवाएं और एक्सपायर्ड लैब किट मौजूद हैं। इसी के आधार पर सोनौली थाने ने जिला मजिस्ट्रेट को एक रिपोर्ट भेजी। इसके बाद पांच जुलाई 25 को एक दल ने अस्पताल का दौरा किया और रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल सील कर दिया गया। इसे कार्रवाई को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अस्पताल निर्माण के अंतिम चरण में था और पूरा होने पर पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाना था। पूर्व में एक आवेदन किया गया था, जिसे प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली, बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण और अग्निशमन प्रणाली की कमी के आधार पर अस्वीकार कर दिया गया। इन कमियों को दूर करने के बाद वे फिर से संबंधित विभाग को निरीक्षण के लिए आमंत्रित करेंगे और पंजीकरण प्राप्त करने के बाद ही संचालन शुरू करेंगे।
वहीं, सरकारी वकील ने प्राप्त निर्देशों के अनुसार बताया कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई मरीज नहीं मिला और न ही यह चालू स्थिति में पाया गया। कोर्ट के इस सवाल पर कि क्या निरीक्षण दल को डॉक्टर का दवा लिखा पर्चा या बिक्री का प्रमाण मिला, जवाब नकारात्मक था।
कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अधिकारियों ने जल्दबाजी में कार्रवाई की। अस्पताल बिना पंजीकरण के चल रहा है या नहीं, इसके बिना कोई ठोस सबूत के अस्पताल सील कर दिया। कोर्ट ने सील खोलने का आदेश दिया। साथ ही राज्य को जुर्माना राशि संबंधित अधिकारियों से वसूलने की स्वतंत्रता दी।