जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मोबाइल फोन में बार-बार तकनीकी खराबी और संतोषजनक सेवा न देने पर कंपनी व उसके अधिकृत सर्विस सेंटर को दोषी माना है। इस पर आयोग ने उपभोक्ता को नया मोबाइल फोन उपलब्ध कराने व उसकी पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम व सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की पीठ ने निशी फातिमा के परिवाद पर दिया।
शाहगंज निवासी याची निशी फातिमा ने आरोप लगाया था कि 31 दिसंबर 2018 को मोबाइल फोन 72,200 रुपये में खरीदा था। कुछ ही महीनों में उसमें नेटवर्क की समस्या उत्पन्न हो गई। इसके बाद कई बार कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर पर मोबाइल जमा किया पर हर बार बिना स्थायी समाधान के लौटा दिया गया। सर्विस के दौरान मोबाइल की स्थिति और खराब हो गई। उसमें ऑटो स्विच-ऑफ और पावर फेल जैसी गंभीर समस्याएं आने लगीं। जनवरी-2020 में मोबाइल दोबारा सर्विस सेंटर में जमा कराया गया, जिसे बिना ठीक किए ही वापस लेने का दबाव बनाया गया। इस पर याची ने आयोग में परिवाद दाखिल किया।
कंपनी की ओर से दलील दी गई कि मोबाइल की वारंटी समाप्त हो चुकी थी। याची ने किसी सरकारी प्रयोगशाला की विशेषज्ञ रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। याची ने कहा कि जब मोबाइल वारंटी अवधि में बार-बार सर्विस सेंटर गया और कंपनी स्वयं उसके दोष स्वीकार कर रही थी, तब अलग विशेषज्ञ रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। आयोग ने मामले को सेवा में कमी मानते हुए आदेश दिया कि विपक्षी दो माह के अंदर याची से खराब मोबाइल वापस लेकर 72,200 रुपये मूल्य का नया उपलब्ध कराए। ऐसा नहीं करने की स्थिति में 72,200 रुपये की राशि आठ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित परिवाद दायर करने की तिथि से भुगतान करे। साथ ही 10,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 5,000 रुपये वाद व्यय भी अदा करे।