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हाईकोर्ट ने कहा: 'पत्नी शिक्षित है और वह कमा सकती है, इस आधार पर भरण-पोषण के दावे को खारिज नहीं कर सकते'

Fri, 10 Oct 2025 07:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court News : तलाक के बाद पत्नी और बच्ची के भरण पोषण के लिए हर माह 40 हजार रुपये देने का आदेश कानपुर की फेमिली कोर्ट ने दिया है। इस आदेश के खिलाफ पति ने इलाहाबाद कोर्ट में याचिका दायर की थी। पति का तर्क था कि पत्नी शिक्षित है और वह कमा सकती है। कोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले पर मुहर लगा दी। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी शिक्षित है और वह कमा सकती है के आधार पर भरण-पोषण के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह की एकलपीठ ने परिवार न्यायालय के पत्नी के पक्ष में 40 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के आदेश को चुनौती देने वाली कानपुर नगर निवासी गौरव गुप्ता की अर्जी खारिज कर दी।

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10 अक्तूबर 2018 को गौरव की शादी रितिका से हुई थी। उन्हें एक बेटी हुई। कुछ दिन बाद पति-पत्नी में विवाद हो गया। पति ने तलाक के लिए परिवार न्यायालय में अर्जी दाखिल कर दी। वहीं, पत्नी ने 14 फरवरी 2022 को भरण-पोषण की मांग कर आवेदन दाखिल किया। परिवार न्यायालय ने आठ अक्तूबर 2024 को पत्नी के लिए 20 हजार व बेटी के लिए 20 हजार रुपये भरण-पोषण का आदेश दिया। इस फैसले के गौरव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि भरण-पोषण की राशि ज्यादा है। उनका वेतन 20 हजार रुपये प्रति माह है। पत्नी पढ़ी लिखी है और उनके पास इंटीरियर डिजाइनिंग की डिग्री है। शादी से पहले और बेटी के जन्म तक वह काम कर रही थी और अच्छा खासा पैसा कमा रही थी। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही पत्नी अत्यधिक योग्य है, लेकिन वह वर्तमान में बच्चे की देखभाल के कारण काम करने में असमर्थ है। कोर्ट ने यह भी पाया कि पति ने अपनी आय छिपाई है। उसके पास पत्नी और बच्ची के भरण-पोषण के पर्याप्त साधन हैं।
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कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का भी हवाला देते हुए कहा कि एक सक्षम, स्वस्थ युवक को पत्नी और बच्चों के लिए पर्याप्त कमाई करने में सक्षम माना जाता है। ऐसे में कोर्ट ने परिवार न्यायालय के 40 हजार रुपये प्रति माह भरण-पोषण की राशि का फैसला बरकरार रखते हुए अर्जी खारिज कर दी।

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