मामला वर्ष 2021 की सहायक अध्यापक भर्ती का है। यूपी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 12603 पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। ओबीसी श्रेणी के लिए जारी कट-ऑफ अन्य उम्मीदवारों के बराबर होने के कारण उन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा गया था। इस सूची में आरक्षित श्रेणी से कम अंक पाने वाले सामान्य अभ्यर्थियों को सबसे ऊपर रखा गया था। जबकि ज्यादा अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी के सीटों से वंचित किया जा रहा था। इसके खिलाफ अखिलेश कुमार व अन्य की ओर से एकल पीठ में याचिका दाखिल की गई थी, जिसे एकल पीठ ने स्वीकार किया था। प्रतीक्षा सूची नए सिरे से तैयार करने का आदेश दिया था।
इस आदेश को चयन बोर्ड ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी है। बोर्ड की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि बोर्ड ने सामान्य श्रेणी की रिक्त रह गई सीटों के आधार पर प्रतीक्षा सूची तैयार कर नियुक्ति की सिफारिश कर रहा है। चूंकि सभी सीटें सामान्य वर्ग की हैं इसलिए सामान्य वर्ग को सूची में शामिल किया गया है। यह भी तर्क दिया कि मुख्य चयन सूची में आरक्षण लागू हो चुका है। एक श्रेणी को दूसरी श्रेणी में स्थानांतरित नही किया जा सकता। इसके अलावा यह तर्क भी दिया कि एकल पीठ में दाखिल याचिका में सामान्य वर्ग के हितबद्ध अभ्यर्थियों को प्रतिवादी नहीं बनाया गया था। कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के याचियों के वकील उत्कर्ष बिरला को विशेष अपील के विरुद्ध आपत्ति दाखिल करने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी है।मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी।