मान्यता प्राप्त प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक बनने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षक नियमावली के संशोधित नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में दो जनवरी 2016 को प्रकाशित विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। विनोद कुमार शुक्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर ने दिया।
मान्यता प्राप्त उच्च प्राथमिक विद्यालय सहायक अध्यापक के चार और प्रधानाध्यापक के एक पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया। इसमें अन्य अर्हताओं के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य शर्त थी। प्रधानाध्यापक के लिए अन्य अर्हताओें के साथ पांच वर्ष का शैक्षणिक अनुभव भी निर्धारित किया गया। याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाईस्कूल)(नियुक्ति एवं अध्यापकों की सेवा शर्तें) नियमावली 1978 में पांच दिसंबर 2012 को संशोधन कर नियम 4 में सहायक अध्यापकों के लिए अन्य अर्हताओं के अलावा टीईटी उत्तीर्ण करने की शर्त जोड़ी गई।
जबकि नियम 4(2) में प्रधानाध्यापक के लिए न्यूनतम पांच वर्ष का अध्यापक के रूप में शैक्षणिक अनुभव की अनिवार्यता जोड़ी गई। याची के अधिवक्ता का कहना था कि टीईटी की अनिवार्यता सहायक अध्यापक के लिए है और चूंकि प्रधानाध्यापक के लिए पांच वर्ष का अध्यापक के रूप में शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य है, इसलिए उसके लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है।