ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीनों को टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार भले ही इस पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त प्रवेश कर लगाने पर विचार कर रही हो लेकिन इससे ग्राहकों को खास नुकसान नहीं होगा। हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है लेकिन टैक्स लागू होने पर इस चुनावी वर्ष में सरकार की झोली अवश्य भरेगी। एक अनुमान के मुताबिक अकेले इलाहाबाद में ढाई से तीन लाख लोग प्रतिदिन ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। इसमें युवा, निजी कंपनियों के कर्मचारी, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। ऑनलाइन कंपनियों के जरिए ग्राहक मोबाइल, कपड़े, एसेसरीज, सजावटी सामान, दवाएं, फूड सप्लीमेंट आदि मंगाते हैं। प्रवेश कर पर कैबिनेट से फैसला होने के बाद ग्राहकों को ऑनलाइन शॉपिंग पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त रकम देनी होगी। जानकारों का कहना है कि इसका ग्राहकों पर खास असर नहीं होगा।
जबॉग, मंत्रा, फिल्पकार्ट, शॉपक्लूज, स्नैपडील, होमशॉप-18, एमेजॉन, नापतोल, वोनिक. क्राफ्ट्सविला जैसी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों से शहर में बड़ी संख्या में लोग सामान मंगाते हैं। इन कंपनियों के उत्पादों की कीमत पहले ही बाजार से कम होती है। इसके अलावा कुरियर से आने वाला उत्पाद पसंद न आने पर वापसी का भी विकल्प होता है। दूसरे ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां उत्पादों पर जबरदस्त ऑफर देती हैं, जिसकी वजह से ग्राहक उसकी ओर ज्यादा आकर्षित होती हैं। कई बार तो तमाम उत्पादों पर 50, 60 या फिर 80 फीसदी तक की भी छूट दी जाती है इन सामानों की होम डिलेवरी के लिए सड़कों पर मोटरसाइकिलों पर बड़े-बड़े बैग कंधों पर लादे कुरियर कंपनियों के कर्मचारी भी दिख जाएंगे।
प्रदेश कैबिनेट ऑनलाइन शॉपिंग पर टैक्स लगाने का फैसला पहले ही कर चुकी है। माना जा रहा है कि अब अध्यादेश लाकर इसे लागू किया जाएगा। कर एवं वित्त सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग पर पांच प्रतिशत प्रवेश कर लगने पर ग्राहकों को खास नुकसान नहीं होगा क्योंकि यह कंपनियां पहले ही बाजार से कम कीमत पर उत्पाद उपलब्ध कराती हैं। उदाहरण के लिए बाजार में कोई उत्पाद अगर सौ रुपये का है तो ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी वही 90 रुपये में उपलब्ध कराती है। ऐसी स्थिति में पांच प्रतिशत प्रवेश कर लगता भी है तो उत्पाद की कीमत 95 रुपये होगी, यानी अतिरिक्त टैक्स लगने पर भी ग्राहक को बाजार से कम कीमत पर ही उत्पाद उपलब्ध होंगे।