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रिश्तों की मर्यादा सिखाता है गुरुकुलम

Sun, 11 Dec 2016 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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श्रीराधे-राधे सेवा समिति की ओर से मीरापुर स्थित डीएवी कॉलेज परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को प्रख्यात कथाव्यास देवकी नंदन ठाकुर ने कहा, गुरुकुलम रिश्तों की मर्यादा सिखाता है। विडंबना है कि वर्तमान में ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में पाश्चात्य पद्धति से शिक्षा दिलाने में गर्व का अनुभव करते हैं। नतीजतन देश के बच्चे संस्कृति और संस्कार से दूर होते जा रहे हैं। देव भाषा संस्कृत के अध्ययन के बगैर भारतीय संस्कृति का पोषण और संरक्षण कठिन है। 
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इससे पहले उन्होंने फिर सांस्कृतिक आतंकवाद को रेखांकित किया। कहा, कान्वेंट में पढ़ रहे बच्चों में अंग्रेजी शिक्षा के पाश्चात्य संस्कार बीजारोपित किए जा रहे हैं। वहीं अभिभावक भी उन्हें सही मायनों में भारतीय संस्कृति और संस्कार नहीं दे पा रहे हैं। चीन के लोगों ने अंग्रेजी, जापानी, यूरोपीय भाषाओं को नहीं सीखा। उन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति का सम्मान किया। उसी में सोचा, उसी भाषा में विकास कर महाशक्ति के रूप में खड़े हैं। अब हमें भी इसी तरीके से सोचना है।

वहीं श्रीमद्भागवत कथाक्रम में उन्होंने परीक्षित श्राप, शुकदेव मुनि आगमन प्रसंग की कथा सुनाई। जय कन्हैया लाल के घोष से कथा स्थल गूंजता रहा। कार्यक्रम में प्रकाश डालमिया, अनिल जैन, विजय केसरवानी, विजय अरोरा, बृजराज तिवारी, पवन तिवारी आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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प्रख्यात कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कथा स्थल पर मौजूद लोगों को संस्कृति और संस्कार बचाने के लिए संकल्प दिलाया। कहा, आप सभी लोगों का सहयोग मिले तो सांस्कृतिक आतंकवाद को समाप्त किया जा सकता है। पहली शुरुआत अपने बच्चों को हिंदी बोलने दो। अपने बच्चों को समझाओ कि कान्वेंट स्कूल की कामचलाऊ भाषा को जुबां पर तो चढ़ाओ पर दिमाग पर चढ़ने न देना। आप सभी अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों से परिचित कराने का दायित्व निर्वहन करें।
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