Take care of family's difficulty in compassionate appointment: High Court
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करते समय पीड़ित परिवार की कठिनाई और आर्थिक स्थिति पर विचार करना जरूरी है। सिर्फ आवेदन में विलंब जैसे तकनीकी कारण के आधार पर आवेदन खारिज कर देना उचित नहीं है।
कोर्ट ने आजमगढ़ के मृतक पुलिस कांस्टेबल के परिवार की आवश्यकता एवं आर्थिक स्थिति पर विचार किए मृतक आश्रित की अर्जी विलंब के आधार पर निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एसएसपी आजमगढ़ ने स्वयं याची के बालिग होने पर अर्जी देने पर विचार का आश्वासन दिया था। ऐसे में राज्य सरकार को विलंब माफ कर नियुक्ति पर विचार करना चाहिए। ऐसा न करना शिव कुमार दुबे केस में निर्धारित विधि सिद्धांत के विपरीत है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को अर्जी दाखिल करने में देरी को माफ कर नियमानुसार दो माह में नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली ने दीपक यादव की याचिका पर दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने बहस की।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि याची के पिता यादवेंद्र यादव पुलिस कांस्टेबल थे। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई। उस समय याची नाबालिग था। 2009 में उसकी मां एसएसपी कोे आवेदन किया कि उनके बेटे के बालिग होने पर नियुक्ति दी जाए। 25जनवरी 10 को एसएसपी ने याची की मां को आश्वासन दिया कि बालिग होने पर अर्जी दे। याची ने बालिग होने पर अर्जी दी तो यह कहकर निरस्त कर दिया कि उसने आवेदन करने में पांच वर्ष से अधिक का विलंब किया है। कोर्ट ने कहा कि आश्रित परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर सरकार निर्णय ले। एसएसपी ने बिना विचार किए अर्जी खारिज कर दी। जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया है।