यह शिकायत भाजपा के कानूनी और विधि विभाग के जिला संयोजक भोलानाथ पांडेय ने मुख्यमंत्री से की थी। आरोप है कि बीते वर्ष विद्युत यांत्रिक खंड में फर्मों से स्वीकृत बजट के विपरीत न्यूनतम दर पर निविदा डलवाकर शेष धनराशि डकार ली गई। उच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर आठ, 10 और 18 में कराए गए विद्युतीय कार्यों में फर्जी भुगतान कर दिया गया है। इतना ही नहीं वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान निलंबित एक्सईएन दिनेश यादव के कार्यकाल का वीआरएफ/वीआरवी, एससी का अनुबंध गठित कर चहेती फर्म को फर्जी भुगतान किए जाने का भी मामला शासन की जानकारी में पहुंचा है।
इसी तरह उच्च न्यायालय में नेटवर्किंग के कार्य में भी मानक को ताक पर रखकर लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है और एग्रीमेंट के तहत गारंटी, वारंटी के दस्तावेज नहीं सौंपे गए। अब शासन की ओर से इस मामले के पन्ने पलटे जाने से यांत्रिक खंड के अफसरों का सांसें फूलने लगी हैं। पता चला है कि हाल में ही इस मामले में एक्सईएन को अभिलेखों के साथ तलब भी किया गया था।