शहर के वार्ड संख्या 20 संत झूले नगर का चुनाव अदालत ने अवैध घोषित कर दिया है। अदालत ने निर्वाचित पार्षद विजय पुर्सवानी द्वारा दाखिल जाति प्रमाणपत्र को भी गलत करार देते हुए कहा है कि वह अपनी घोषित जाति ‘कोरी’ की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसलिए अनुसूचित जाति का गलत प्रमाणपत्र लगाकर चुनाव लड़ने के कारण 27 जून 2012 को हुआ चुनाव अवैध और मनमाना है। पूर्व पार्षद नटवर लाल भारतीय द्वारा दाखिल चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदलाल ने यह आदेश दिया है।
नटवर लाल ने विजय पुर्सवानी के निर्वाचन को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि वार्ड संख्या 20 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई थी। निर्वाचित पार्षद विजय पुर्सवानी ने अनुसूचित जाति का नहीं होने के बावजूद फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाया और चुनाव जीत गए। नटवर लाल के प्रार्थनापत्र पर तहसीलदार सदर ने जाति प्रमाणपत्र की जांच की और 17 जुलाई 2012 को इसे फर्जी मानते हुए रद कर दिया।
तहसीलदार के आदेश को विजय पुर्सवानी ने मंडलीय फोरम में चुनौती दी थी। मंडलीय फोरन ने भी उनकी अपील खारिज कर दी। इस दौरान नटवर लाल ने निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दाखिल कर दी। विजय पुर्सवानी का दावा था कि उनके पूर्वज सिंध पाकिस्तान के मूल निवासी हैं और कोरी जाति के हैं। कोरी जाति को यहां अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है। विजय द्वारा अपनी जाति के समर्थन में अपने पिता का जन्म प्रमाणपत्र की फोटो कॉपी दाखिल थी जो सिंघ सरकार द्वारा जारी किया गया था। अदालत ने इसे उपयुक्त साक्ष्य नहीं माना।