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swami vivekananda death anniversary: बीमार गुरुभाई की सेवा-टहल के लिए प्रयागराज आए थे स्वामी विवेकानंद

Mon, 04 Jul 2022 11:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के प्रयागराज आगमन का उल्लेख आशा प्रसाद की पुस्तक स्वामी विवेकानंद एक जीवनी में विस्तार से किया गया है। आशा प्रसाद लिखते हैं कि दिसंबर 1889 में स्वामी विवेकानंद वैद्यनाथ धाम से बनारस पहुंचे, लेकिन वहां जाने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि उनके इलाहाबाद में गुरुभाई योगानंद को छोटी माता निकल आई हैं।
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स्वामी विवेकानंद - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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स्वामी विवेकानंद अपने बीमार गुरुभाई की सेवा-टहल के लिए संगमनगरी आ चुके हैं। तब उन्होंने यहां पखवारे भर से अधिक प्रवास किया था। इस दौरान संतों के साथ सत्संग, अक्षयवट दर्शन के भी कई प्रमाण मिलते हैं। सोमवार को उनकी पुण्यतिथि पर उनके प्रयागराज आगमन से जुड़ी बातें एक बार फिर प्रासंगिक हो गई हैं।

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युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के प्रयागराज आगमन का उल्लेख आशा प्रसाद की पुस्तक स्वामी विवेकानंद एक जीवनी में विस्तार से किया गया है। आशा प्रसाद लिखते हैं कि दिसंबर 1889 में स्वामी विवेकानंद वैद्यनाथ धाम से बनारस पहुंचे, लेकिन वहां जाने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि उनके इलाहाबाद में गुरुभाई योगानंद को छोटी माता निकल आई हैं।


इसके बाद वह अपने गुरु भाई की सेवा के लिए इलाहाबाद चले आए। इसका प्रमाण सत्येंद्र मजूमदार की पुस्तक विवेकानंद चरित से भी मिलता है। मजूमदार की पुस्तक में स्वामी विवेकानंद का वह पत्र भी प्रकाशित है, जिसमें उन्होंने अपनी इलाहाबाद यात्रा का जिक्र किया है। स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र काशी के वेद विद्वान प्रमदा दास गुप्त को लिखा है। पत्र का मजमून इस तरह है- आपको एक पत्र में विखा था कि एक-दो दिन में काशी आ रहा हूं। परंतु विधि के विधान का का खंडन कौन कर सकता है।

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मुझे पता चला है कि मेरे गुरुभाई योगानंद चित्रकूट, ओंकारेश्वर का दर्शन कर इलाहाबाद आकर माता के रोग से ग्रसित हो गए हैं। इसलिए उन्हीं की सेवा-टहल करे के लिए मैं इलाहाबाद आ गया हूं।   इस किताब के मुताबिक 30 दिसंबर 1889 को इलाहाबाद पहुंचने के बाद यहां के बंगालियों ने उनकी खूब आवभगत की। गुरुभाई की सेवा के बाद विवेकानंद वहां के लोगों के साथ आध्यात्मिक और सामाजिक विषयों पर सत्संग किया करते थे।


यहीं उनका परिचय एक मुसलमान फकीर से हुआ, जिनका चेहरा उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस से मिलता-जुलता था। विवेकानंद उनकी ओर आकृष्ट हो गए। यहीं इलाहाबाद में उन्हें गाजीपुर के एक सिद्ध योगी पवहारी बाबा के बारे में भी जानकारी मिली। 18 जनवरी 1890 को स्वामी विवेकानंद पवहारी बाबा से मिलने गाजीपुर चले गए। इस तरह विवेकानंद कुल 20 दिन इलाहाबाद में रहे।
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