मुझे पता चला है कि मेरे गुरुभाई योगानंद चित्रकूट, ओंकारेश्वर का दर्शन कर इलाहाबाद आकर माता के रोग से ग्रसित हो गए हैं। इसलिए उन्हीं की सेवा-टहल करे के लिए मैं इलाहाबाद आ गया हूं। इस किताब के मुताबिक 30 दिसंबर 1889 को इलाहाबाद पहुंचने के बाद यहां के बंगालियों ने उनकी खूब आवभगत की। गुरुभाई की सेवा के बाद विवेकानंद वहां के लोगों के साथ आध्यात्मिक और सामाजिक विषयों पर सत्संग किया करते थे।
यहीं उनका परिचय एक मुसलमान फकीर से हुआ, जिनका चेहरा उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस से मिलता-जुलता था। विवेकानंद उनकी ओर आकृष्ट हो गए। यहीं इलाहाबाद में उन्हें गाजीपुर के एक सिद्ध योगी पवहारी बाबा के बारे में भी जानकारी मिली। 18 जनवरी 1890 को स्वामी विवेकानंद पवहारी बाबा से मिलने गाजीपुर चले गए। इस तरह विवेकानंद कुल 20 दिन इलाहाबाद में रहे।