झुका प्रशासन, स्वामी स्वरूपानंद को त्रिवेणी पर मिली दोनों पीठों की भूमि
पंद्रह जनवरी के बाद आएंगे शंकराचार्य, अमावस्या पर लगाएंगे डुबकी
प्रयागराज। ज्योतिष एवं द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के मामले में प्रशासन झुका। कल तक अपनी ना-ना से निकलक र उसने उन्हें चार सहायक संस्थाओं सहित ज्योतिष एवं द्वारका-शारदा, दोनों ही पीठों की भूमि त्रिवेणी मार्ग पर ही आवंटित कर दिया। इसी के साथ कम भूमि मिलने पर शिविर न लगाने की बात बेमानी हो गई। अब पहली जनवरी को शिविर के लिए भूमि पूजन किया जाएगा।
शिविर प्रभारी और मनकामेश्वर मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक पहले त्रिवेणी मार्ग पर ज्योतिर्मठ के नाम से 200 गुणे 200 की भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन, द्वारका शारदा पीठ सहित चार सहायक संस्थाओं के नाम पर 200 गुणे 160 वाली भूमि देने में प्रशासन आनाकानी कर रहा था। ‘अमर उजाला’ ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
मामले में पहले मंडलायुक्त के हस्तक्षेप और फिर वार्ता के बाद डीएम की ओर से जारी आदेश पर रिकार्ड के मुताबिक दोनों पीठों, संस्थाओं की कुल मिलाकर 300 गुणे 160 भूमि आवंटित कर दी। स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर में राम मंदिर सहित अनेक सनातनी मुद्दों पर संगोष्ठियां होंगी। शंकराचार्य जी पंद्रह जनवरी के बाद आएंगे और मौनी अमावस्या स्नानपर्व पर संगम में डुबकी लगाएंगे। उनका बाकी का कार्यक्रम बाद में तय किया जाएगा। बता दें, भूमि आवंटन के मामले में विवाद के कारण ही वर्ष 2018 के माघ मेले में शंकराचार्य का शिविर नहीं लग पाया था।