कहा कि अब यह सवाल उठेगा कि भारत को हिंदूर राष्ट्र कैसे घोषित किया जाए। तब सभी को यह मानना होगा कि आदिकाल से सभी के पूर्वज सनातनी वैदिक कला हिंदू थे। यहां से हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने पर बात उठनी चाहिए। शंकराचार्य स्वामी स्वारुपानंद जी महाराज के उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के सवाल पर पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था। जो होंगे वो अघोषित ही होंगे। फिर क्या कारण था कि उन्होंने किसी के नाम की घोषणा नहीं की। इन सवालों पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही गद्दी की जो परंपरा है, उसका पालन करना चाहिए।
काशी में ज्ञावापी और श्रृंगार गौरी मामले पर किए गए सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि हमारी दृष्टि केवल काशी, मथुरा तक सीमित नहीं है। बल्कि मक्का में मक्केश्वर महादेव तक है। परिवार नियोजन पर कानून लाने के सवाल पुरी शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा कहीं न कहीं प्रभावित हुई है। गर्भपात और परिवार नियोजन का कानून कई धर्मों के लोग नहीं मानेंगे। इसका प्रभाव किसी न किसी रुप में हिन्दुओं पर ही पड़ेगा।
पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज मंगलवार की रात गया से चलकर प्रयागराज पहुंचे थे। 16 सितंबर तक पुरी शंकराचार्य झूंसी के शिव गंगा आश्रम में प्रवास करेंगे। 17 सितंबर को पुरी शंकराचार्य प्रयागराज से राजस्थान के लिए प्रस्थान करेंगे। इस मौके पर शंकराचार्य के सचिव निरविकल्पानंद जी, प्रफुल्ल जी महाराज आदि मौजूद रहे।