जगद्गुरु स्वामी शांडिल्य महाराज ने केंद्र सरकार से मांग उठाई है कि हिंदुओं के मठ, मंदिरों और बड़े धार्मिक स्थलों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रसाद बनाने का जिम्मा ऐसे लोगों को मिलना चाहिए जो सनातनी हों और उसकी शुद्धता और पवित्रता का ख्याल रख सकते हों।
आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट से संत समाज में आक्रोश बना हुआ है। मामले में अब श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य महाराज ने तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट को ईसाई मिशनरियों की बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने यूपी के मंदिरों में भी प्रदेश सरकार से प्रसाद की जांच कराए जाने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर के प्रसाद में मिलावट का मामला सामने आने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने प्रसाद में मिलावट के लिए आंध्र प्रदेश की तत्कालीन जगन मोहन रेड्डी सरकार को जिम्मेदार बताया।
जगद्गुरु स्वामी शांडिल्य महाराज ने केंद्र सरकार से मांग उठाई है कि हिंदुओं के मठ, मंदिरों और बड़े धार्मिक स्थलों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रसाद बनाने का जिम्मा ऐसे लोगों को मिलना चाहिए जो सनातनी हों और उसकी शुद्धता और पवित्रता का ख्याल रख सकते हों। उन्होंने कहा है कि अगर मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं तो मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर भी सरकारी नियंत्रण में होने चाहिए।