त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में मंगलवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि माघ पापों के नाश का महीना है। अघ का मतलब होता है पाप और मा का मतलब होता है महीना।
त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में मंगलवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि माघ पापों के नाश का महीना है। अघ का मतलब होता है पाप और मा का मतलब होता है महीना। माघ माह में संगम स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मनुष्यों के 365 दिन के बराबर देवताओं का एक दिन होता है। माघ माह देवताओं का ब्रह्म मुहूर्त होता है।
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प्रयागराज को गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम माना जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर सारे देवता यहां स्नान करने आते हैं। इसी समय धरती पर रहने वाले लोेग भी देवताओं के साथ स्नान करके इसका लाभ उठाते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि 14 जनवरी को दोपहर बाद और 15 को दिनभर मकर संक्रांति स्नान का योग है।
धर्म की बात धर्माचार्य को ही शोभा देती है
शंकराचार्य कहा कि धर्म की बात धर्माचार्य करे तो ही सही माना जाता है। नेता धर्म की बात कैसे कह सकते हैं। कोई चिकित्सक या वैद्य ही दवा की बात कह सकता है। कोई अन्य व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र की बात करता है तो वह शोभा नहीं देता है। आजकल परंपरा चल रही है कि धर्म की बात हर व्यक्ति करने लगता है उसको चाहे उसके बारे में कुछ पता है या नहीं। लोग उनकी बात को मान भी रहे हैं।
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जो हिंसा से दूर है वही हिंदू
स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू एक ही है। सदा से चले आने के कारण सनातन माना जाता है। दोनों एक ही है। हिंसा से दूर रहने वाले को हिंदू कहते हैं। हि का मतलब हिंसा और दू का मतलब दूर। जो हिंसा से दूर है वही हिंदू है। कहा कि इस बार हम कोई अपना संदेश नहीं देंगे। माघ मेले में आए सारे संत महात्मा जो निचोड़ निकालेंगे उसी को हम आगे बढ़ाएंगे।