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सुत्ता सिंह ने संभाल लिया पदभार

Tue, 19 Mar 2019 01:08 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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68500 शिक्षक भर्ती के मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप में निलंबित तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ. सुत्ता सिंह ने सोमवार को वर्तमान सचिव की अनुपस्थिति में कार्यालय में जाकर कार्यभार ग्रहण कर लिया। डॉ. सुत्ता के निलंबन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 14 मार्च को पारित अंतरिम आदेश दिया था। इस आदेश के बाद सोमवार को दिन में 11 बजे डॉ. सुत्ता सिंह ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पहुंचकर कार्यभार ग्रहण कर लिया। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने इसे डॉ. सुत्ता सिंह की मनमानी बताया है। कहा कि शासन की ओर से अभी वह ही सचिव पद पर नियुक्त हैं, जब तक उन्हें हटाने का शासनादेश जारी नहीं होता, वह पद पर बने रहेंगे।

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वहीं डॉ. सुत्ता सिंह की ओर से जारी प्रभार आदेश में कहा गया कि 14 मार्च को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर से पारित आदेश के बाद उन्होंने निदेशक राज्य शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश और सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उत्तर प्रदेश का पदभार 18 मार्च को हस्तांतरित किया गया। प्रभार प्रमाणपत्र पर डॉ. सुत्ता सिंह के ही हस्ताक्षर हैं, इसमें वर्तमान निदेशक एवं सचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं। इस बारे में सुत्ता सिंह से फोन पर जब संपर्क किया गया तो उन्होंने पदभार ग्रहण करने की बात तो स्वीकारी, लेकिन इसके बाद फोन काट दिया।


वर्तमान सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि वह विभागीय बैठक में सोमवार को लखनऊ आए थे, इस दौरान उन्हें कार्यालय से पता चला कि डॉ. सुत्ता सिंह ने उनकी अनुपस्थिति में पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने बताया कि सुत्ता सिंह को हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश मिलने के बाद अभी तक शासन से पदभार ग्रहण करने का आदेश नहीं मिला है। सुत्ता सिंह की ओर से मनमाने तरीके से पदभार ग्रहण करने की बात को उन्होंने शासन के पास लिखित रूप में दे दिया है। शासन की ओर से उन्हें ही पद पर काम करने को कहा गया है। यह भी कहा गया कि उनकी अनुपस्थिति में कार्यालय में पहुंचकर मनमाने तरीके से पद ग्रहण करने से शिक्षक भर्ती कागजात से छेड़छाड़ हो सकती है।
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परीक्षार्थियों ने किया विरोध
0 सचिव परीक्षा नियामक के पद पर मनमाने तरीके से सुत्ता सिंह की एक बार फिर से ताजपोशी को 68500 शिक्षक भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों ने विरोध किया है। परीक्षा में शामिल इन अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट में कमजोर साक्ष्य रखकर एक बार फिर से प्रदेश की भाजपा सरकार ने डॉ. सुत्ता सिंह को बचाने का कार्य किया है। परीक्षार्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट की एकल पीठ की ओर से सीबीआई जांच के खिलाफ डबल बेंच में जाकर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच रोकवाई, अब सुत्ता सिंह को बचाकर एक बार फिर से शिक्षक भर्ती की गड़बड़ी को दबाने का काम कर रही है। इसका जवाब परीक्षार्थी आगामी चुनाव में देंगे।

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