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surrender ration card : प्रयागराज जिले में एक हजार से अधिक अपात्रों ने सरेंडर किए राशन कार्ड

Fri, 20 May 2022 07:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राशन कार्ड सरेंडर करने की अवधि अब समाप्त होने जा रही है। प्रशासन ने एक सप्ताह में राशन कार्डों के सर्वे और सत्यापन कराने की योजना बनाई है। जल्द ही इसके लिए टीम घोषित की जाएगी। सर्वे तथा सत्यापन के बाद यदि कोई अपात्र राशनकार्डधारक मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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राशन कार्ड का अपग्रेडेशन - फोटो : file photo
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विस्तार
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सक्षम होने के बावजूद गरीबों का हक मारने वाले एक हजार से अधिक अपात्रों ने राशन कार्ड सरेंडर कर दिए हैं। खास यह कि  पांच तोे अंत्योदय कार्ड वापस हुए हैं। विगत वर्षों में जांच के बाद 25 हजार से अधिक राशन कार्ड निरस्त किए गए थे। इन्होंने फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनवा लिए थे। इतनी बड़ी संख्या में निरस्तीकरण के बावजूद अपात्रों के राशन कार्ड बनवाने की शिकायतें बनी हुई हैं।

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इसके बाद शासन की ओर से एक बार फिर सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। सर्वे से पहले अपात्रों को खुद ही राशन कार्ड सरेंडर करने की चेतावनी दी गई है। इस चेतावनी का असर भी दिख रहा है और एक हजार से अधिक अपात्रों ने राशन कार्ड सरेंडर कर दिए हैं।

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एक सप्ताह में शुरू होगा सर्वे
राशन कार्ड सरेंडर करने की अवधि अब समाप्त होने जा रही है। प्रशासन ने एक सप्ताह में राशन कार्डों के सर्वे और सत्यापन कराने की योजना बनाई है। जल्द ही इसके लिए टीम घोषित की जाएगी। सर्वे तथा सत्यापन के बाद यदि कोई अपात्र राशनकार्डधारक मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
 

अब आया अप्रैल का खाद्यान्न, मई का पता नहीं
प्रयागराज। राशनकार्ड धारकों को मई के राशन के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। अभी तक न राशन आया है औ न ही कोई निर्देश। राशन वितरण की व्यवस्था पिछले महीने से ही पटरी से उतर गई है। अप्रैल महीने में गेहूं और चावल तो गोदामों में पहुंच गया था लेकिन चना, तेल और नमक की आपूर्ति नहीं हो पाई थी। इसकी वजह से अप्रैल में राशन का वितरण नहीं हो सका। हालांकि, अब गेहूं, चावल के साथ चना, तेल, नमक भी पहुंच गया है। वितरण भी शुरू हो गया है लेकिन मई महीने का राशन कब तक वितरित होगा इस बाबत कोई निर्देश नहीं दिया गया है। जबकि, 20 मई तक वितरण हो जाना चाहिए।
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नहीं हुई गेहूं की खरीद, मिलेगा चावल
इस बार गेहूं क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है। अधिक तापमान की वजह से उत्पादन में करीब 20 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा व्यापारियों ने अधिक कीमत देकर किसानों से घर पर ही गेहूं की खरीद कर ली है। इसका नतीजा है कि सरकारी केंद्रों पर इस वर्ष 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं की भी खरीद नहीं हो पाई है। जबकि, लक्ष्य 75 हजार मीट्रिक टन है। यह स्थिति पूरे देश में है। इसका नतीजा है कि राशन की दुकानों से खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था में भी बदलाव का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने कई राज्यों का कोटा खत्म या कम कर दिया है। ऐसे में सरकारी दुकानों से गेहूं की जगह चावल वितरण की घोषणा की गई है।
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