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सूरज के तेवर तीखे, नदियों में निकले टापू

Fri, 22 Apr 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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कम हो रहा गंगा का जल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सूरज के तीखे तेवर से गंगा-यमुना के जलस्तर पर खतरा मंडरा रहा है। इलाहाबाद में गंगा का जलस्तर पहले से बेहद कम और पारा लगातार चढ़ने के कारण रसूलाबाद घाट, तेलियरगंज में शंकरघाट होकर फाफामऊ पुल और वहां से दारागंज तक बीच में कई जगह गंगा जल बेहद कम हो गया है। इन हिस्सों में गंगा में जगह-जगह टीले बने गए हैं। गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह जलस्तर इतना कम हो चुका है कि लोग गंगा किनारे से संगम तक नदी में पैदल ही चले जा रहे हैं। यमुना की भी स्थिति ठीक नहीं है। उसमें भी जलस्तर लगातार कम होने के कारण टीले नजर आने लगे हैं। ऊपर से जल न छोड़े जाने के कारण भीषण गर्मी वाले मई माह में गंगा-यमुना की स्थिति और दयनीय होगी। गंगा में तेजी से कम हो रहे जल के कारण उसकी सफाई में लगी ट्रैस स्कीमर मशीन से काम करना भी मुश्किल होगा। इस हालत को देखते हुए वर्ष 2018 तक गंगा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करने का केंद्र सरकार का दावा अब सवाल बना दिख रहा है।
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गंगा को स्वच्छ तभी किया जा सकता है, जब उसमें पर्याप्त मात्रा में जल हो। ऐसी स्थिति में उसे स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त करने की बात तो दूर, पर्याप्त मात्रा में जल पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह विडंबना ही है कि  धर्म नगरी प्रयाग में गंगा का अस्तित्व नालों से गिर रहे पानी की वजह से बचा हुआ है। वैसे गर्मी बढ़ने के साथ गंगा जल लगातार घट रहा है। रसूलाबाद घाट पर गंगा की बीच धारा में जगह-जगह टापू नजर आने लगे हैं। कुछ आगे बढ़ने पर शंकरघाट से फाफामऊ पुल और वहां से दारागंज स्थित दशाश्वमेध घाट तक भी गंगा में जलस्तर इतना कम हो चुका है कि बीच-बीच में टापू बन गए हैं।

संगम पर जहां देश-विदेश से प्रतिदिन सैकड़ों लोग डुबकी लगाने पहुंचते हैं, वहां भी गंगा की स्थिति बेहद दयनीय है। यहां यमुना की ओर तो पानी पर्याप्त है, लेकिन गंगा में घाट के किनारे से अंदर तक घुटने तक भी जल नहीं है। इसकी वजह से संगम पर भी कई जगह टापू बन गए हैं, जिस पर फूल-माला, सिंदूर, नारियल, प्लास्टिक के डिब्बे आदि बेचने वालों की दुकानें सजने लगी हैं। वहीं गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का जो चोरी-छिपे मेहंदौरी और सलोरी एसटीपी से नाले का पानी बिना ट्रीटमेंट के छोड़ दे रहा है, जिसकी वजह से गंगा में काला ही सही, जल नजर आ रहा है। यमुना में करेलाबाग से घूरपुर की ओर पानी काफी कम हो चुका है। इसकी वजह से यमुना के इस हिस्से में भी बीच-बीच टीले नजर आने लगे हैं।
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गंगा में पर्याप्त मात्रा में जल अब सिर्फ माघ और कुंभ मेला के अवसर पर ही नजर आता है। वह भी तब जब केंद्र सरकार हस्तक्षेप करती है। उत्तराखंड से पर्याप्त मात्रा में जल न छोड़े जाने के कारण ही गंगा की यह हालत हुई है। सिंचाई विभाग के पूर्व अधीक्षण अभियंता उमेश शर्मा का कहना है कि गंगा स्वच्छ तभी होंगी, जब उसमें पर्याप्त मात्र में जल हो। इसके लिए जरूरी है कि उत्तराखंड से गंगा में नियमित रूप से तय मात्रा में जल छोड़ा जाता रहे। यह तभी संभव है, जब केंद्र सरकार इस पर गंभीरता दिखाए, वरना दावे चाहे जितने कर लिए जाएं, गंगा का उद्धार नहीं होगा।
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