याची के वकील का एपी सिंह और अशरफ अली का कहना था कि याची ने नवंबर 2021 में एक वकील के व्यवसायिक कदाचार से जुड़ी शिकायत की थी। लेकिन करीब तीन साल साल बाद भी उसका निस्तारण नहीं हो सका। वह उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में लंबित है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से वकीलों के खिलाफ लंबित शिकायतों की सूची तलब की है। कोर्ट ने कहा कि समयबद्ध निस्तारण के बजाए शिकायतों को लंबित रखना ठीक नही। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति डोनादी रमेश की खंडपीठ ने याची कैलाशपति की ओर से एक अधिवक्ता के खिलाफ बार काउंसिल में लंबित शिकायत का समयबद्ध निस्तारण करने की मांग वाली याचिका दिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को पेशेवर कदाचार से जुड़ी शिकायतों की स्थिति और सूची अगली सुनवाई पर अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
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याची के वकील का एपी सिंह और अशरफ अली का कहना था कि याची ने नवंबर 2021 में एक वकील के व्यवसायिक कदाचार से जुड़ी शिकायत की थी। लेकिन करीब तीन साल साल बाद भी उसका निस्तारण नहीं हो सका। वह उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में लंबित है।
कोर्ट ने हैरानी जताई, कहा एक वर्ष की निर्धारित अवधि के बाद ऐसी शिकायतों के निस्तारण के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया की संदर्भित कर दिया जाता है। लेकिन कोर्ट में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से जुड़ी ऐसी आई याचियाएं दाखिल हो रही है। जिस पर कई वर्षों तक फैसला नही आ पा रहा, ऐसे मामलों को लेकर यूपी बार काउंसिल को गंभीर होने की जरूरत है।
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शिकायतों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया को संदर्भित करने से बेहतर है कि इसका समयबद्ध निस्तारण किया जाए। साथ ही शिकायतकर्ताओं को उनके मामले की जानकारी शिकायतकर्ताओं को देने के साथ ही, वाद की स्थिति का प्रकाशन बार काउंसिल की वेबसाइट पर भी किया जाए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तेरह मई की तारीख नियत करते हुए पेशेवर कदाचार से जुड़ी शिकायतों की स्थिति तलब की है।