Prayagraj News : एमएनएनआईटी में मानव रहित कार का परीक्षण किया गया।
- फोटो : अमर उजाला।
टीम के सदस्य बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र गौरव शर्मा बताते हैं कि अभी तो शोध की शुरुआत हुई है। इस पर काम होता रहेगा। 15 वर्ष से अधिक पुरानी कारें अमूमन अनुपयोगी हो जाती हैं। हम ऐसी कारों में किट का इस्तेमाल कर कई चरणों में परीक्षण करेंगे। जैसे-जैसे सफलता मिलेगी, उसी के अनुरूप किट को भी अपग्रेड किया जाएगा। अभी तो बैटरी चालित गोल्फ कार्ट पर परीक्षण हुआ है। आगे के चरणों में किसी भी ईंधन से चलने वाली कार पर परीक्षण किया जाएगा।
Prayagraj News : एमएनएनआईटी में मानव रहित कार का परीक्षण किया गया।
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अभी सेंसर से आगे-पीछे ही जा सकती है कार
शुरुआती चरण में गोल्फ कार्ट में जिस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है, वह कार को सिर्फ आगे और पीछे ले जाने में ही सक्षम है। पांच से नौ मीटर की दूरी में अगर कोई मौजूद हैं, तो इसमें लगा सेंसर दुर्घटना से बचने के लिए इसकी जानकारी दे देता है और अपने आप रुक जाती है। शोध के अगले चरणों में कार को इधर-उधर मोड़ने और गंतव्य तक पहुंचाने पर काम होगा।
नेटवर्क कमजोर होने पर हुई दिक्कत
चालक रहित गोल्फ कार्ट के प्रदर्शन के दौरान सेंसर के जरिये इसे चलाने में कुछ दिक्कतें भी आईं। बीच-बीच में सेंसर काम करना बंद कर दे रहा था। ऐसे में गोल्फ कार्ट की अगली सीट पर बैठे व्यक्ति को अलग से ब्रेक लगाना पड़ा। टीम के सदस्यों ने बताया कि नेटवर्क कमजोर होने के कारण कभी-कभी ऐसा होता है। शोध का यह शुरुआती चरण है। अभी इस पर काफी काम होना बाकी है।