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पांच घंटे की पढ़ाई, तीन घंटे जाम

Sat, 26 Nov 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट पानी टंकी चौराहे पर जाम की समस्या पुराने शहर में रहने वालों क ो कांटे की तरह चुभती है। पुराने शहर के तमाम मोहल्लों से हजारों विद्यार्थी हर रोज सिविल लाइंस स्थित स्कूलों में पढ़ने आते हैं। स्कूल में तकरीबन पांच घंटे की पढ़ाई के लिए इन्हें हर रोज तकरीबन तीन घंटे जाम में जूझना पड़ता है। यह समस्या बरसों से बनी हुई है। इसके बावजूद किसी जनप्रतिनिधि या अफसर को विद्यार्थियों का दर्द नजर नहीं आता है।  यह समस्या आए दिन होती है।
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शहर की आधी से ज्यादा आबादी पुराने शहर में रहती है और ज्यादातर अच्छे स्कूल सिविल लाइंस तथा आसपास के इलाकों में हैं। लूकरगंज, खुल्दाबाद, चौक, रोशनबाग, मालवीय नगर, करेली, अतरसुइया, मीरापुर, शास्त्रीनगर, शाहगंज, दरियाबाद सहित दर्जनों मोहल्ले के बच्चे, स्कूल में पांच घंटे की हर रोज तीन घंटे से ज्यादा का वक्त जाम में बर्बाद करते हैं। हाईकोर्ट की वजह से जीटी रोड पर पानी टंकी से एकलव्य चौराहे तक ट्रैफिक रोक दिया जाता है। ऐसे में पूरा ट्रैफिक दबाव नवाब युसूफ रोड पर आ जाता है। हाईकोर्ट पानी टंकी चौराहे पर पूरे दिन जाम लगा रहता है।

स्कूलों में छुट्टी के बाद जल्दी घर पहुंचने को बेताब बच्चे घंटों जाम में जूझने के बाद ही घर पहुंच पाते है। इस बीच रिक्शा, ट्रॉली और स्कूल बस में बैठे-बैठे भूख-प्यास से बेहाल होना स्वाभाविक है। वक्त पर स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें सुबह घर से तकरीबन एक घंटे पहले निकलना पड़ता है, वरना जाम में फंसे तो वक्त पर स्कूल पहुंचना तय है। खुल्दाबाद के रहने वाले एजी कर्मी अशोक कुमार बताते हैं कि पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे का स्कूल टाइम आठ बजे है लेकिन साढ़े छह बजे ही उसे तैयार करना पड़ता है।
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देरी पर ट्रॉली वाला भी कहता है, जाम में फंसे तो एक बच्चे के चक्कर में सभी का स्कूल छूट जाएगा। शाहगंज निवासी कारोबारी शेख जमाल अख्तर उर्फ गुड्डू का कहना है कि कई बार स्कूल छूटने के घंटे भर बाद भी बेटा घर नहीं पहुंचता तो परेशानी बढ़ जाती है। बस ड्राइवर को फोन करने पर पता चलता है कि जाम में है। पुराने शहर में रहने वाले हजारों अभिभावक ऐसी ही समस्या से जूझते हैं।

खुल्दाबाद, लूकरगंज, नखासकोहना, अटाला, करेली, शाहगंज समेत दर्जनों मोहल्ले के इन बच्चों के सामने किसी दूसरे रास्ते का विकल्प भी नहीं है। सिविल लाइंस से पुराने शहर को जाने के लिए हाईकोर्ट पानी टंकी या फिर निरंजन डाट पुल दो ही रास्ते है। दोनों ही रास्तों पर पूरे दिन जाम लगा रहता है।
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