हिम्मतगंज स्थित मुनौव्वर शाह बाबा की दरगाह पर मानसिक रोगियों को जंजीर और बेड़ियाें से बांध कर इलाज करने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को फटकार लगाई है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याची द्वारा प्रस्तुत फोटोग्राफ देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि फोटोग्राफ देखने से साफ है कि रोगियों से किस प्रकार का बर्ताव हो रहा है। इस प्रकार का बर्ताव तो जानवरों से भी नहीं किया जाता है। और प्रशासन इसे हल्के में ले रहा है।
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी को स्वयं जाकर पूरे मामले को देखना चाहिए और यदि आरोप सही हैं तो कार्रवाई की जानी चाहिए थी। सामाजिक संस्था मुहिम ने दरगाह में मानसिक रोगियों को बेड़ियों में जकड़कर इलाज करने के खिलाफ याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने जिला प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी।
प्रशासन ने बताया कि दरगाह में मानसिक रोगियों को हथकड़ी और जंजीर में जकड़कर इलाज करने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इस पर याची की ओर से अदालत के सामने कुछ तस्वीरें प्रस्तुत की गई।
तस्वीरों से स्पष्ट था कि दरगाह पर जंजीरों से बांधकर इलाज किया जाता है। कोर्ट ने दरगाह के पदाधिकारियों को भी तलब किया था। उनको अगली सुनवाई पर भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि वह मौके पर जाकर जांच करें कि वह कौन लोग हैं जो जंजीरों से बंधे हुए तस्वीरों में दिखाई दे रहे हैं। दरगाह में हो रहे अमानवीय इलाज की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।