महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की ओर से अब हिन्दी के साथ ही उर्दू में भी डिग्री दी जाएगी। इसके तहत हिन्दी विश्वविद्यालय से उर्दू में एमए, एमफिल और पीएचडी की जा सकेगी।
एमए के लिए दो वर्ष, एमफिल के लिए एक वर्ष और पीएचडी की डिग्री तीन वर्ष की है। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वीकृति मिल चुकी है। पाठ्यक्रम अगले सत्र से शुरू करने की तैयारी है।
बतौर विषय विशेषज्ञ इलाहाबाद विवि उर्दू विभाग के प्रोफेसर एए फातमी सहित अलीगढ़ मुस्लिम विवि, जवाहरलाल नेहरू विवि और उदयपुर विवि के प्रोफेसर को पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है।
प्रोफेसर फातमी के मुताबिक हिन्दी विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के सदस्य के रूप में उन्होंने इसका प्रस्ताव रखा था। तब सिद्धांत रूप में सहमति से ज्यादा बात नहीं बनी थी।
बाद में कुलपति विभूति नारायण राय ने पहल की और आयोग की मंजूरी मिल गई। अब पाठ्यक्रम बनाने की तैयारी है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि हिन्दी के साथ ही उर्दू की पढ़ाई का मकसद ‘हिन्दुस्तानी’ की भावना को बढ़ावा देना है। यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की संकल्पना थी।
एमए हिन्दी और एमए उर्दू दोनों के लिए ही ‘हिन्दुस्तानी’ का पेपर अनिवार्य किया गया है। उर्दू वाले इसे फारसी और हिन्दी वाले देवनागरी में दे सकते हैं।