अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर फंसाया गया
छात्र का दावा है कि उसने तोड़फोड़ और पिटाई नहीं की। उसे सिर्फ इसलिए फंसाया गया क्योंकि उसने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और इसके खिलाफ परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इन कारणों से उसे संस्थान छोड़कर बिहार स्थित चंपारण में घर लौटना पड़ा।
वहीं, रजिस्ट्रार अंबक कुमार राय का कहना है कि नजीबुल्लाह जुलाई से दिसंबर-2024 में तीसरे सेमेस्टर में फेल हो गया था। उसने जनवरी से जून-2025 के तहत तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा दोबारा दी और पास होने पर दबाव बनाने लगा कि तीसरे की जगह उसे चौथे सेमेस्टर में पास मानकर डिग्री प्रदान कर दी जाए। छात्र पर 36 हजार रुपये बकाया था। इसके बावजूद फेलोशिप के रूप में उसके 84 हजार रुपये भी जारी कर दिए गए।
उसकी बात नहीं मानी गई तो वह डीन ऑफिस पहुंच गया। वहां तोड़फोड़ की और गार्ड को पीटा। इसकी वीडियो रिकाॅर्डिंग संस्थान के पास है। दोबारा परीक्षा देने के बाद तीसरे सेमेस्टर में पास होने पर छात्र से कहा गया था कि वह चौथे सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन करा ले लेकिन वह नहीं माना। उसके अभिभावकों को तीन पत्र लिखे गए लेकिन जवाब नहीं आया।