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भटके मरीज-तीमारदार, नहीं मिले ‘भगवान’

Fri, 06 Jul 2018 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से बृहस्पतिवार को एसआरएन अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई। ओपीडी के बाहर लाइन लगाए मरीज और तीमारदार घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौटे। वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने हाल पूछने वाला कोई नहीं था। वरिष्ठ चिकित्सक राउंड लेने वार्डों तक नहीं पहुंचे। इमरजेंसी तक ले जाए गए गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हुआ। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि मेडिसिन और टीबी चेस्ट विभाग को छोड़कर अन्य विभागों की ओपीडी में मरीज देखे गए।
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एसआरएन अस्पताल परिसर में ओपीडी में डॉक्टरों के न मिलने से घंटों इंतजार कर मरीजों, तीमारदारों को जैसे-जैसे यह पता चला कि रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल है तो वे एक के बाद एक वापस होने लगे। सर्वाधिक दिक्कत दूर-दराज और गैर जिलों से आने वाले मरीजों को हुई। स्त्री एवं प्रसूति विभाग में तो कुछ गंभीर प्रसव पीड़िताओं को भर्ती किया गया लेकिन, सामान्य दिनों की तरह ओपीडी में मरीज नहीं देखे जा सके। इसी तरह अन्य विभागों में भी दोपहर बाद सन्नाटा पसर गया। धूप और गर्मी से बचने के लिए अस्पताल परिसर में पेड़ और शेड के नीचे शाम तक बैठे रहे।

गढ़ी मानिकपुर से आए कमलेश मौर्या अपने बेटे प्रियांशु को लेकर आए थे। हेपेटाइटिस बी से पीड़ित प्रियांशु की जांच रिपोर्ट डॉक्टर को दिखानी थीं। डॉक्टर नहीं मिले तो निराश होकर वहीं बैठे रहे। इसी तरह कौशाम्बी के मूरतगंज से पैर में फैक्चर के बाद दिखाने आए राजेश कुमार को मायूसी का सामना करना पड़ा। वह शाम तक पत्नी के साथ इस इंतजार में हड्डी रोग विभाग के बाहर बैठे रहे कि शायद डॉक्टर आ जाएं तो दोबारा न आना पड़े। ऊंचाहार रविकुमार पिता की रिपोर्ट और पर्चे लेकर दवा लिखाने आए थे। प्रतापगढ़ के रानीगंज में धनुहा गांव निवासी जटाशंकर सीने में दर्द की शिकायत लेकर आए थे। काफी प्रयास के बाद भी उन्हें चिकित्सक का परामर्श नहीं मिला, जबकि उन्होंने करीब साढ़े आठ बजे पर्चा बनवा लिया था। ये तो ऐसे मरीज हैं जो शाम तक डॉक्टर का इंतजार करते रहे। इसी तरह कोरांव से लक्ष्मी, जारी के रामखेलावन, नवाबगंज के सीताराम और ढोकरी के जगराम सिंह, हंडिया के सर्वेश आदि इलाज कराए बिना लौटने को मजबूर हुए।
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मेडिकल कॉलेज में मौजूदा रेजिडेंट डॉक्टरों में करीब तीस फीसदी पीएमएस संवर्ग के हैं। जेआर तृतीय मतलब तृतीय वर्ष के छात्र प्रमोद कुमार गुप्ता के साथ हुई घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ खुद डॉ. प्रमोद ने पीएमएस संवर्ग का होने के  नाते सौतेले व्यवहार और उत्पीड़न का आरोप लगाया। पीएमएस एसोसिएशन के सचिव डॉ. कमलाकर सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि आए दिन मेडिकल कॉलेज में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों के साथ अभद्रता की जाती है। उन्हें इस बात को कहकर हतोत्साहित किया जाता है कि वे गांव से नौकरी कर पढ़ाई करने आए हैं।

माफीनामा और निलंबन के बाद भले ही एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों ने काम पर लौटने की घोषणा कर दी हो लेकिन, खटास अभी बनी है। देर शाम रेजिडेंट डॉक्टरों ने बैठक कर खुद को मजबूत करने की रणनीति पर विचार किया। आईसीयू से ही डॉ. प्रमोद गुप्ता ने जिलाधिकारी को संबोधित पत्र में घटना का विवरण देते हुए भविष्य में उत्पीड़न की आशंका जताई है। उन्होंने लिखा कि उन्हें भविष्य चौपट करने की धमकी वरिष्ठों ने दी है, ऐसे में वह सहमे हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज के पुरा छात्र डॉ. भगवत पांडेय ने बृहस्पतिवार को एसआरएन में डॉ. प्रमोद का हालचाल लिया। उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखा है कि मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने से सच्चाई सामने आ जाएगी। इस घटना को लेते हुए कड़े निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

एसआरएन अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से मेडिकल कॉलेज शिक्षक एसोसिएशन और जूनियर डॉक्टरों के संगठन जेडीए ने पल्ला झाड़ लिया है। शिक्षक एसोसिएशन के सचिव डॉ. दिलीप चौरसिया ने प्राचार्य को दिए गए पत्र में शिक्षकों के साथ अभद्रता और अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं जेडीए ने बृहस्पतिवार को हुई हड़ताल से खुद को अलग बताया है। दावा किया कि वे अपने काम में लगे थे।
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