केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ ने रक्षा मंत्रालय के एक कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित किए जाने के मामले में संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
न्यायाधिकरण ने कहा कि जिस वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (एसीआर) के आधार पर कर्मचारी की पदोन्नति रोकी गई। वह उसे कभी बताई ही नहीं गई थी। ऐसे में उस प्रविष्टि के आधार पर पदोन्नति से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति ओम प्रकाश सप्तम और सदस्य (प्रशासनिक) मोहन प्यारे की खंडपीठ ने आगरा निवासी गजेंद्र सिंह की याचिका पर दिया।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि गजेंद्र सिंह को 2002 में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति मिली थी। 2008 में उन्हें मैटेरियल असिस्टेंट पद पर पदोन्नति दी गई। 2018 में सीनियर मैटेरियल असिस्टेंट पद के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक हुई लेकिन एसीआर के आधार पर उनका नाम पदोन्नति के लिए अनुमोदित नहीं किया गया। प्रतिकूल प्रविष्टि कभी उन्हें बताई ही नहीं गई।
वहीं, विभाग की ओर से कहा गया कि एक जनवरी 2021 से उन्हें पदोन्नति दे दी गई थी, इसलिए विवाद समाप्त हो चुका है।न्यायाधिकरण ने कहा कि विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित प्रतिकूल एसीआर याची को कब और कैसे संप्रेषित की गई थी। ऐसे में यह माना जाएगा कि प्रविष्टि कभी बताई ही नहीं गई।
न्यायाधिकरण ने आदेश दिया कि एसीआर की प्रविष्टियां दो सप्ताह में याची को उपलब्ध कराई जाएं। प्रविष्टि मिलने के बाद याची यदि उसके उन्नयन के लिए प्रत्यावेदन देता है तो विभाग दो सप्ताह में उस पर निर्णय लेगा।
यदि एसीआर उन्नत होती है और याची मेरिट सूची में स्थान पाता है तो उसे उसके जूनियर कर्मचारियों के साथ पदोन्नति देते हुए सभी परिणामी सेवा और वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं।