इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लापरवाही के कारण विभाग को हुई आर्थिक क्षति के लिए बिजली विभाग के कर्मचारी के खिलाफ जारी 2,87,963 रुपये की वसूली के आदेश पर रोक लगा दी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लापरवाही के कारण विभाग को हुई आर्थिक क्षति के लिए बिजली विभाग के कर्मचारी के खिलाफ जारी 2,87,963 रुपये की वसूली के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही मुख्य अभियंता को कर्मचारी के प्रत्यावेदन पर तीन हफ्ते में नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने मुरादाबाद में तैनात राजेंद्र सिंह की याचिका पर दिया है। याचिका के मुताबिक याची पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, मंझोला, मुरादाबाद में कार्यरत है। उसके खिलाफ कर्तव्य पालन में लापरवाही और निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप में विभागीय कार्यवाही की गई थी।
अनुशासनिक प्राधिकारी ने चार दिसंबर 2021 को दंड आदेश पारित किया था। इसके बाद 24 मार्च 2026 को आदेश जारी कर 2,87,963 रुपये की आर्थिक क्षति निर्धारित करते हुए उसकी वसूली का निर्देश दिया गया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची की ओर से दलील दी गई कि 25 सितंबर 2019 के आदेश में उन्हें केवल एक लाख रुपये की आर्थिक क्षति के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। ऐसे में बाद में क्षति की राशि बढ़ाकर करीब तीन लाख रुपये किए जाने का कोई औचित्य नहीं है।
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निगम की ओर से दलील दी गई कि 24 मार्च 2026 का आदेश 2021 में पारित दंड आदेश का ही परिणाम है। उसमें वेतन से वसूली का निर्देश पहले ही दिया गया था। क्षति की वास्तविक राशि का निर्धारण बाद में किया गया।