इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम की ओर से दारागंज स्थित मकान को ध्वस्तीकरण के दिये गये आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही एसडीएम को मौका मुआइना कर यह जांच करने का आदेश दिया है कि याची का विवादित मकान अलग संपत्ति है या उसका प्रतिवादी रवींद्र गिरी की जमीन से कोई संबंध है। कोर्ट के आदेशानुसार सर्वे रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में पेश करनी होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अखिलेश कुमार शुक्ल की याचिका पर दिया।
मामला बक्शी कलां दारागंज स्थित मकान नंबर 182 से जुड़ा है। याची का दावा है कि रवींद्र गिरी ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने की मांग की थी। जिलाधिकारी ने याची को सुनवाई का अवसर दिए बिना ही मौजूदा निर्माण को ध्वस्त करने और जमीन की घेराबंदी के लिए बाउंड्री वॉल बनाने के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दे दिया।
खंडपीठ ने प्रयागराज के जिलाधिकारी को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निजी प्रतिवादी रवींद्र गिरी को याचिका लंबित होने की विधिवत सूचना दे दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी।