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राज्य विवि : शिक्षकों को अब इलाज के लिए मिलेंगे ढाई लाख रुपये, शिक्षक कल्याण कोष का गठन

Sun, 10 Apr 2022 11:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

शिक्षक कल्याण कोष से आर्थिक सहायता के पात्र केवल विश्वविद्यालय परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों के मौलिक पद पर कार्यरत नियमित शिक्षक व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के वह शिक्षक होंगे।
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money new - फोटो : istock
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विस्तार
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय और इसके संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए राहत वाली खबर है। शिक्षकों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए शिक्षक कल्याण कोष का गठन कर दिया गया है, जिसे ‘शिक्षक कल्याण कोष अनुदान नियमावली’ का नाम दिया गया है। 

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शिक्षक कल्याण कोष से आर्थिक सहायता के पात्र केवल विश्वविद्यालय परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों के मौलिक पद पर कार्यरत नियमित शिक्षक व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के वह शिक्षक होंगे, जिनकी विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित सेवा अवधि पांच वर्ष होगी। शिक्षक कल्याण कोष के लिए मूल्यांकन पारिश्रमिक से कटौती का प्रावधान किया गया है, लेकिन सेवानिवृत्त शिक्षकों के मूल्यांकन पारिश्रमिक से शिक्षक कल्याण कोष में कोई कटौती नहीं की जाएगी और न ही उन्हें इस कोष से किसी प्रकार की सहायता दी जाएगी।

हादसा होने पर एक लाख मिलेंगे

कैंसर, गुर्दे, ह्दय रोग, मस्तिष्क रोग जैसी गंभीर असाध्य बीमारियों की शल्य चिकित्सा के लिए प्राप्त आवेदनों पर शिक्षक कल्याण कोष समिति की ओर विस्तृत परीक्षण किए जाने के बाद अधिकतम ढाई लाख रुपये तक चिकित्सालय के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से सीधे भेजे जाएंगे। सेवा अवधि में दुर्घटना होने पर एक लाख रुपये तक का आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।

 
 
सेवा काल में किसी शिक्षक के आकस्मिक निधन पर आश्रितों को तीन लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। ऐसे में शिक्षक, जो शिक्षक संघ और महासंघों के निर्देशों का अनुपालन नहीं करते हैं, उन्हें इस कोष से किसी प्रकार की सहायता नहीं दी जाएगी।
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प्रत्येक छह माह में होगी बैठक
शिक्षक कल्याण कोष की बैठक प्रत्येक छह माह में एक बाद अवश्य होगी। इसके साथ ही एक पंजिका में प्रत्येक महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय को इस कोष से दी जाने वाली सहायता राशि का वार्षिक लेखाजोखा अलग-अलग तैयार किया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस महाविद्यालय के किन शिक्षकों को कब, क्यों और कितनी धनराशि स्वीकृति की गई। यह पंजिका समिति की प्रत्येक बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।


कुलपति होंगे समिति के अध्यक्ष
शिक्षक कल्याण कोष समिति में कुलपति या उनकी ओर से नामित शिक्षक (अधिष्ठाता/प्रोफेसर) समिति के अध्यक्ष होंगे। वित्त अधिकारी, कुलसचिव पदेन सदस्य होंगे। महाविद्यालय, अनुदानित महाविद्यालय शिक्षक संघ और विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष इस समिति के सदस्य होंगे। इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।


‘राज्य विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को इलाज कराने, दुर्घटना होने या आकस्मिक निधन की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए शिक्षक कल्याण कोष का गठन किया गया है। नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। -’ प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, कुलपति, प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय
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