इस सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों, वैज्ञानिकों ने भी पुराने दिनों की यादें ताजा कीं। अमेरिका से आए डॉक्टर दीपक एडवर्ड, वैज्ञानिक रवि चंद्रन, सुरेंद्र कुमार और कनाडा से आए मनदीप सिंह ने दोस्तों के साथ बिताकर मुग्ध हुए। इस मिलन समारोह में ब्रिगेडियर अहमद अली का कहना था कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी बचपन के दोस्तों ने मिलने का समय निकाला, यह आत्मीय लगाव और अपनेपन का सबसे बड़ा उदाहरण है।
पूरा छात्रों ने अपने कॉलेज की उन दिनों की शिक्षिका रही शहनाज गांधी और शिक्षक फ्रांसिस मूर से मिलकर खुशी जताई। सेवानिवृत्त आईएएस प्रदीप शुक्ला, अमित मोहन सरन का कहना था कि जहां उनकी पढ़ाई की इतनी मजबूत और गहरी बुनियाद भरी गई, उसे वह कभी नहीं भूल सके। इस कॉलेज से उनका हमेशा लगवा बना रहेगा। संचालन सेवा निवृत्त आईएएस अफसर संदीप शर्मा ने किया। बचौर मुख्य अतिथि कॉलेज के प्रिंसिपल थामस कुमार ने पुराछात्रों को सम्मानित किया। इस दौरान कॉलेज के शिक्षक ज्योति दुबे, समर चटर्जी भी उपस्थित रहे।
अलग-अलग क्षेत्रों में शीर्ष पर पहुंचे उनके पढ़ाए छात्रों का अरसा बाद भी इतनी आत्मीयता से मिलना और सम्मान प्रदान करना मेरे लिए बड़ी बात है। इतना लगाव मेरे प्रति अब तक बना रहेगा, कभी सोचा नहीं था। यह उनके लिए बड़ी बात है। - शहनाज गांधी, शिक्षिका।
यह कॉलेज मेले जीवन में पवित्र स्थल के रूप में है। इस कॉलेज की पढ़ाई के मायने रहे हैं। यहां के गुरुओं के ज्ञान और मार्गदर्शन की ही देन है कि 1972 बैच में जितने भी छात्र थे, सभी क्लास वन अफसर बनकर निकले। - ब्रिगेडियर, अहमद अली