बताते हैं कि सोमवार दोपहर करीब 12 बजे ईएमओ डॉ. सोनू सिंह पैथोलॉजी में पहुंचे और डीएमएलटी प्रशिक्षु भीम सेन से एक ब्लड सैंपल की जांच रिपोर्ट जल्द देने को कहा। आरोप है कि प्रशिक्षु ने उनसे क्रम से आने को कह दिया। इससे भड़के ईएमओ ने उसे थप्पड़ मार दिया। प्रशिक्षु ने इसकी जानकारी दी तो मेडिकल कॉलेज से उसके बैच के दर्जनों साथी एसआरएन के ट्रामा सेंटर पहुंच गए। ईएमओ की पिटाई शुरू कर दी। बीचबचाव करने पर इमरजेंसी कक्ष में मौजूद छह-सात जूनियर डॉक्टरों को भी पीटा गया।
वहीं, साथियों ने घटना की जानकारी दी तो बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर भी जुट गए और डीएमएलटी प्रशिक्षुओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। पिटने वालों में छात्राएं भी शामिल थीं। डीएमएलटी प्रशिक्षु भागकर मेडिकल कॉलेज गए तो जूनियर डॉक्टर वहां भी पहुंच गए। डॉक्टरों ने कुछ देर कार्य बहिष्कार भी किया। पूरे घटनाक्रम से एसआरएन अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं करीब दो घंटे तक प्रभावित रहीं।
सीओ कोतवाली तीन थानों की फोर्स लेकर एसआरएन पहुंचे। एसआरएन एसआईसी व मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल समेत पूरा प्रशासनिक अमला भी मेडिकल कॉलेज पहुंच गया। वहां दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया गया। घंटों पंचायत के बाद समझौता भी हो गया। सीओ कोतवाली सत्येंद्र प्रसाद ने बताया कि मैं मौके पर गया था, तब तक मामला शांत हो चुका था। किसी पक्ष से कोई तहरीर भी नहीं मिली है।
प्रकरण की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई है। जांचोपरांत जो रिपोर्ट कमेटी देगी, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज
डीएमएलटी प्रथम वर्ष का पूरा बैच निलंबित
देर शाम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज कैंपस से एसआरएन अस्पताल में पहुंचकर मारपीट को घोर अनुशासनहीनता मानते हुए डीएमएलटी प्रथम वर्ष का पूरा बैच सस्पेंड कर दिया गया। इनमें 100 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जो बातें सामने आई हैं, उसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
मची रही अफरातफरी, मरीज हुए परेशान
घटना से एसआरएन अस्पताल में घंटों अफरातफरी मची रही। घटना के दौरान कुछ देर के लिए ट्रामा सेंटर व अन्य वार्डों में मरीजों का उपचार भी ठप हुआ। हालांकि थोड़ी देर बाद काम शुरू हो गया। उधर, सैंपल देने व जंाच रिपोर्ट लेने पैथोलॉजी लैब पहुंचे मरीजों-तीमारदारों को निराश होना पड़ा। घटना के दो घंटे बाद तक भी वहां कामकाज नहीं शुरू हो सका था।