प्रयागराज रही शास्त्रीजी की कर्मभूमि
शास्त्रीजी जन्मे तो मुगलसराय में, लेकिन प्रयागराज ही उनकी कर्मभूमि रही। शास्त्री जी आजादी के बाद सोरांव से 1952 में विधायक रहे और प्रदेश में मंत्री रहे। बाद में पंडित नेहरू ने उन्हें राज्यसभा पहुंचाकर रेल मंत्री बनाया। 1957 में वे इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य चुने गए और गृहमंत्री बनाए गए। 1962 में दोबारा यहीं से लोकसभा पहुंचे और 21 जून 1964 में नेहरू के निधन के बाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
शास्त्री जी के वादे को पत्नी ने किया पूरा
1966 में ताशकंद जाने के पूर्व लाल बहादुर शास्त्री मांडा दौरे पर गए, जहां के पिछड़ेपन, अशिक्षा, बेकारी और भूख से दुखी होकर वादा किया कि वह मांडा में विद्यालय का निर्माण कराएंगे। लौटने से पहले ही 11 जनवरी को ताशकंद में उनका निधन हो गया। उनके वादे को पत्नी ललिता शास्त्री ने पूरा किया। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह से दान में जमीन लेकर लाल बहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज की मांडा में स्थापना की, जहां छात्र-छात्राएं दोनों पढ़ते हैं।
मकान मालिक को चाबी देना भूले तो भरा किराया
शास्त्रीजी बलुआ घाट के पास किराये के मकान में रहते थे। केंद्र में मंत्री बनने के बाद दिल्ली चले गए, लेकिन मकान मालिक को चाबी हस्तांतरित करना भूल गए। एक माह बाद शहर लौटने पर एक रुपये किराया यह कह कर दिया कि चूंकि चाबी नहीं दी थी, इस वजह से किराया देना मेरा दायित्व है।