बेनामी संपत्ति संव्यहार प्रतिषेध अधिनियम 1988 के तहत दर्ज मुकदमों के निस्तारण के लिए जिला न्यायालय इलाहाबाद में विशेष कोर्ट गठित की गई है। यहीं पर कार्यरत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश किरन पाल सिंह को इसका विशेष न्यायाधीश बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में इस तरह की दो अदालतें गठित की गई हैं। लखनऊ को 40 और इलाहाबाद को 35 जिलों का क्षेत्राधिकार दिया गया है।
केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के तहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से दोनों अदालतों का क्षेत्राधिकार तय किया गया है। इलाहाबाद को इलाहाबाद, आंबेडकर नगर, आजमगढ़, अमेठी, भदोही, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, चन्दौली, चित्रकूट, देवरिया, फैजाबाद, फतेहपुर, गोंडा, गोरखपुर, गाजीपुर, हमीरपुर, झंासी, जालौन, जौनपुर, कौशांबी, कुशीनगर, ललितपुर, महराजगंज, मऊ, मिर्जापुर, महोबा, प्रतापगढ़, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, संतकबीर नगर, सोनभद्र और वाराणसी का क्षेत्राधिकार दिया गया है। जिला जज अनिल कुमार ओझा ने बेनामी संपत्ति के मुकदमों को सुनवाई के लिए गठित कोर्ट एडीजे कक्ष संख्या 16 एडीजे किरन पाल सिंह की अदालत में भेजे जाने के लिए आदेश दिया है।
बेनामी संपत्ति संव्यवहार प्रतिषेध अधिनियम 1988 में पारित हुआ था। एक नवंबर 2016 को इस एक्ट में संशोधन किया गया है। इस कानून को बनाने का मकसद बेनामी लेनदेन की रोकथाम करना है। उक्त अधिनियम के उपबंधों के अधीन दंडनीय अपराधों के विचारण के लिए विशेष कोर्ट का गठन पूरे देश में किया गया है। इस एक्ट में संपत्ति को जब्त करने, जुर्माना और कैद का प्राविधान है।