समाजवादी पार्टी इस बार नगर निकाय चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने की तैयारी में है। शीर्ष नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं को इसका संकेत दे दिया गया है। साथ में तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया गया है। केंद्रीय नेताओं की ओर से इस तरह का निर्देश दिए जाने के बाद नगर निकाय चुनाव में किसी तरह के गठबंधन की संभावना को भी नकारा जा रहा है। ऐसे में नवंबर तक चुनाव कराने की घोषणा के बीच पार्टी से टिकट के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है।
पिछला नगर निगम चुनाव भाजपा ने पार्टी सिंबल पर लड़ा था। सपा और बसपा ने समर्थित उम्मीदवार उतारा था लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के बाद सपा नगर निकाय चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी में है। खासतौर पर, 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी इस चुनाव के बहाने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना चाहती है। इसलिए पार्टी निकाय चुनाव सिंबल पर लड़ने जा रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद माहौल बदला है, जिसका फायदा सपा निकाय चुनाव में उठा सकती है। इसलिए पार्टी के नेता लोकसभा चुनाव से पहले इसे एकमात्र अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि अन्य दलों से गठबंधन को लेकर नेताओं में कई तरह की आशंकाएं हैं। निकाय चुनाव से पहले प्रदेश में सपा, बसपा और कांग्रेस एक मंच पर आते हैं या नहीं यह फूलपुर लोकसभा सीट पर भाजपा की रणनीति पर निर्भर करेगा।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इस सीट से इस्तीफा देते हैं तो उपचुनाव में संयुक्त प्रत्याशी के बहाने महागठबंधन की नींव पड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि, पिछले चुनाव में अभिलाषा गुप्ता बसपा के समर्थन से महापौर बनी थीं। वहीं इससे पहले चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह कांग्रेस सिंबल पर मेयर बने थे। ऐसे में गठबंधन की स्थिति में महापौर के लिए प्रत्याशी किसका होगा इस पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद चंद्र दुबे का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस बार पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने की बात कही है। जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव का भी कहना है कि निकाय चुनाव सिंबल पर लड़ने की तैयारी है। हालांकि अभी अंतिम निर्णय होना है। अन्य दलों से गठबंधन की बाबत उनका कहना है कि यह बहुत कुछ फूलपुर संसदीय सीट के लिए भाजपा की रणनीति पर निर्भर करेगा।
सपा प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं से जेल में मुलाकात की। जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव, पूर्व प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह आदि नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर विपक्ष को खत्म करने तथा जन भावनाओं को दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि किसानों, व्यापारियों समेत अन्य सभी मुद्दों पर पूरी तरह से फेल सरकार लोगों की आवाज दबाना चाहती है। इसके खिलाफ सपा सड़क पर आंदोलन खड़ा करेगी। जेल में कार्यकर्ताओं से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक विजमा यादव, दान बहादुर मधुर, राकेश सिंह, नाटे चौधरी, जगदीश यादव, अमन प्रताप सिंह, सत्येंद्र यादव, विजय बहादुर पटेल आदि शामिल रहे। विधायक रामवृक्ष यादव, युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष रवींद्र यादव की अगुवाई में भी नेताआें ने जेल में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। रामवृक्ष का कहना था कि नौजवान, किसान विरोधी सरकार समाजवादियों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। प्रतिनिधिमंडल में अंबुज मिश्रा, अनुराग सहगल, कमल सिंह आदि शामिल रहे।