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Allahabad High Court Order : गवाहों के बयान में छेड़छाड़ करने वाले विवेचक की जांच कर कार्रवाई करें एसपी हाथरस

Fri, 16 Sep 2022 11:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में याची का नाम नहीं लिया जबकि मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में याची के दोनों आरोपियों के साथ रहने का बयान दिया है। चश्मदीद ने भी नाम नहीं लिया है।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केस डायरी में दर्ज चश्मदीद गवाहों के बयान में छेड़छाड़ और ओवर राइटिंग कर याची को अभियुक्त बनाने वाले विवेचना अधिकारी के खिलाफ  एसपी हाथरस को जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपर सत्र न्यायाधीश हाथरस की ओर से याची को अपहरण के अपराध से उन्मोचित करने की अर्जी खारिज करने के आदेश को विधि विरुद्ध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 10 सितंबर 20 की कंप्यूटर जेनरेटेड केस डायरी में दो अभियुक्तों का नाम है, याची का नाम नहीं है।

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पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में याची का नाम नहीं लिया जबकि मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में याची के दोनों आरोपियों के साथ रहने का बयान दिया है। चश्मदीद ने भी नाम नहीं लिया है। किंतु 28 अगस्त 20 को दर्ज केस डायरी में चश्मदीद गवाहों के बयान में छेड़छाड़, ओवर राइटिंग कर याची का नाम शामिल किया गया था। इन तथ्यों पर सत्र अदालत ने विचार नहीं करके कानूनी गलती की है।

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कोर्ट ने अपर सत्र अदालत को नए सिरे से विचार कर छह सप्ताह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने बिनेश की याचिका पर अधिवक्ता राहुल कुमार शर्मा को सुनने के बाद दिया है। अधिवक्ता का कहना था कि 26 अगस्त 20 को दर्ज प्राथमिकी में दो लोगों देवेंद्र तथा विक्रम उर्फ  छिग्गा को अपहरण के आरोप में आरोपित किया गया।


दो चश्मदीद गवाहों संजय तथा आशू निवासी तकसान ने भी यही बयान दिया। विवेचना अधिकारी ने इनके बयान में विक्रम को बचाने के लिए छेड़छाड़ कर याची का नाम शामिल करते हुए एफ आईआर के दोनों आरोपियों को अलग कर दिया था। पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से भी इनकार कर दिया है। बाद में पीड़िता ने केवल देवेंद्र का नाम लिया जिन पर विचार नहीं किया गया।
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