काफी जद्दोजहद के बाद जिले के 17 विकासखंडों के गांवों में सचिवों की तैनाती हुई है। हालांकि इस बार भी उनकी तैनाती में नियमों की अनदेखी की गई है। किसी को सात तो किसी तो दो गांवों की जिम्मेदारी दी गई है। सचिवों की तैनाती के बाद अब खाता खुलवाने को लेकर रार छिड़ी हुई है। पंचायतों में प्रशासक तैनात करने के दौरान बिना काम कराए निकाली गई धनराशि को लेकर भी खींचतान मची है।
पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद 25 मई को ग्राम पंचायतों में नई सरकार का गठन हुआ था। सरकार बनने के बाद ब्लॉकों में कई वर्षों से जमे सचिवों को दूसरे विकासखंडों में तैनात किया गया था। कुछ सेक्रेटरी पदोन्नत होकर एडीओ बन गए थे। प्रमोशन पाने वाले एडीओ के गांव रिक्त हो गए थे। काफी दिनों तक स्थानांतरित सेक्रेटरी के अलावा दूसरे सचिवों की तैनाती गांवों में नहीं हो सकी। हाल ही में जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी रविशंकर द्विवेदी ने सचिवों का आवंटित गांवों की सूची जारी की। जिसमें एक बार फिर सेक्रेटरी को बराबर गांवों का आवंटन नहीं किया गया।
सदर विकासखंड में तैनात शिवकुमार श्रीवास्तव को सात, रसीद अहमद, हरिश्चंद्र पांडेय, सत्येंद्रनाथ वर्मा को 6-6, शमा, कौशलेंद्र कुमार शुक्ल, राजेश सिंह को 5-5, संगीता देवी व नरेंद्र बहादुर को 4-4, नेहा सिंह, पारुल सिंह को 3-3 व रुचि वर्मा को 2 गांव ही आवंटित गए गए हैं। उधर, 25 दिसंबर 2020 को प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासक बैठा दिए गए थे। प्रशासक व सचिवों को गांवों में सामुदायिक शौचालय, आंगनबाड़ी भवन के निर्माण कार्य का ही भुगतान करने के लिए निर्देश दिया गया था, मगर ऐसा नहीं हो सका।
अफसरों के आदेश को दरकिनार करते हुए जिले के बाबा बेलखरनाथ, सदर, संडवाचंद्रिका समेत अधिकांश विकासखंड के गांवों से प्रशासकों ने कई मदों में लाखों रुपये विभिन्न फर्मों को ट्रांसफर कर दिए। पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद गांवों में नई सरकार बनी तो प्रशासकों का खेल सामने आया। खुलासा होने पर नवनिर्वाचित प्रधानों ने अधिकारियों से शिकायत भी की, मगर अभी तक जांच चल रही है। इसे लेकर भी सेक्रेटरी व प्रधानों के बीच रार छिड़ी है।
जिला पंचायत अधिकारी रविशंकर द्विवेदी ने बताया कि अधिकारियों की मंशा के अनुरूप सचिवों के स्थानांतरण के बाद रिक्त गांवों में ही सेक्रेटरी की तैनाती की गई है। पुराने सेक्रेटरी को पूर्व में आवंटित गांवों में हेरफेर नहीं किया गया है। प्रशासक के कार्यकाल में यदि किसी ने गलत तरीके से धनराशि खर्च की है तो शिकायत करें। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।