तारामंडल के निदेशक डॉ.वाई रवि किरन बताते हैं कि सूर्यग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। यह सूर्यग्रहण वलयाकार होगा, जिसमें आसमान में सूर्य एक अंगूठी यानी रिंग के आकार में नजर आएगा। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहते हैं।
साल का दूसरा व अंतिम सूर्यग्रहण 14 अक्तूबर को शारदीय नवरात्र के शुरू होने से एक दिन पहले अमावस्या पर लगेगा। पहला सूर्यग्रहण अप्रैल में लगा था। इसके लगने के पंद्रह दिनों के अंतराल पर ही साल का आखिरी चंद्रग्रहण भी लगेगा।
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तारामंडल के निदेशक डॉ.वाई रवि किरन बताते हैं कि सूर्यग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। यह सूर्यग्रहण वलयाकार होगा, जिसमें आसमान में सूर्य एक अंगूठी यानी रिंग के आकार में नजर आएगा। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहते हैं। भारतीय समय के अनुसार 14 अक्तूबर की रात 8:33 से आरंभ होकर मध्य रात्रि में 2:33 बजे तक चलेगा। हालांकि, 14 अक्तूबर को सूर्य ग्रहण रात में लगेगा, इसलिए यह भारत में नहीं दिखेगा। यह उत्तरी अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील, अर्जेंटीना, क्यूबा व कोलंबिया में देखा जा सकता है। संवाद