नोटबंदी के बाद जिन लोगों ने बैंक खातों में रकम जमा की उनमें से अकेले इलाहाबाद में 1.12 लाख लोगों को एसएमएस और ई-मेल के जरिए आयकर विभाग का नोटिस पहुंच गया है। बैंक-खातों की जांच पड़ताल में यह भी सामने आया कि इनमें काफी लोग ऐसे हैं जिन्होंने खातों में अपने परिवार के किसी सदस्य का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड करा दिया। ऐसे लोगों को मैसेज की अनेदखी करना महंगा पड़ सकता है। मोबाइल पर एसएमएस तथा ई-मेल मिलने के 10 दिन के भीतर ऑनलाइन जवाब न देने पर 77.25 प्रतिशत टैक्स भरना होगा।
नोटबंदी के दौरान जिन लोगों ने अपने बैंक खातों में ढाई लाख रुपये से अधिक रकम जमा की, उन्हें आयकर मुख्यालय से नोटिस पहुंच रहा है। इस बीच इलाहाबाद में करीब 1.12 लाख लोगों को मोबाइल पर एसएमएस तथा ऑनलाइन ई-मेल के जरिए नोटिस जारी किया गया। ऐसे लोगों को नोटिस का जवाब भी ऑनलाइन ही देना होगा लेकिन समस्या उन बैंक खातों में जिन्होंने अपने बजाए परिवार के किसी सदस्य का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कराया है। जांच पड़ताल में पता चला है कि ऐसे लोगों की संख्या करीब 38 हजार है। ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ना तय है क्योंकि ऐसे ज्यादातर लोगों को नोटिस के बारे में अब तक पता ही नहीं है। इसकी वजह से अब तक जवाब भी नहीं दिया गया है।
कर एवं वित्त सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल का कहना है कि जिनके पास नोटिस पहुंचा है वह अपने रजिस्टर्ड पैन के आधार पर आयकर की वेबसाइट पर जाकर नगद जमा के कलम में कैश डिपॉजिट पर क्लिक कर पूरा ब्योरा दर्ज कर सकते हैं। जिनके पास नोटिस पहुंच चुका है और वह यह मानते हैं कि उनकी आय टैक्स से मुक्त है, ऐसे लोगों को भी वेबसाइट पर जाकर जवाब देना ही होगा। जिन लोगों ने नोटबंदी के एक-दो दिन पहले रकम निकाली और आदेश के बाद बैंक में जमा की, ऐसे लोगों को सुविधा दी गई कि वेबसाइट पर जाकर बैंक का नाम, खाता नंबर, कुल रकम और निकालने की तिथि दर्ज करें।
जिन लोगों के आयकर मुख्यालय से नोटिस पहुंचा है, उन्हें जवाब 10 दिन में देना है लेकिन ऐसा न करने पर उनके पास तीन मौके होंगे। मुख्यालय उन्हें तीन बार रिमांड भी भेजेगा। इसके बाद भी जवाब न देने पर जुर्माने की कार्रवाई होगी।